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ट्रंप को खुश करने के लिए न हो समझौता, भारत के हितों से नहीं होना चाहिए समझौता: कांग्रेस!

अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता पर जयराम रमेश का हमला, किसानों के हितों पर जताई चिंता!

नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव में आने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने की राजनीति बंद करने की सलाह दी है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान स्वरूप में प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय किसानों और देश के आर्थिक हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

रमेश ने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत पर अनुचित दबाव बनाकर व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसानों पर इस समझौते का गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका दावा है कि अमेरिका अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहता है, जिससे घरेलू उत्पादकों और किसानों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि फरवरी 2026 में जारी भारत-अमेरिका संयुक्त व्यापार वक्तव्य के बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप की जवाबी शुल्क नीति को अवैध ठहराए जाने के बाद भारत को दी गई शुल्क रियायतें प्रभावी रूप से समाप्त हो गई हैं। इसके बावजूद अमेरिका व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका भारत सहित करीब 60 देशों की कथित अनुचित व्यापार प्रथाओं की जांच का इस्तेमाल दबाव के औजार के रूप में कर रहा है। रमेश ने सवाल उठाया कि यदि भारत कोई समझौता कर भी लेता है तो इसकी क्या गारंटी है कि अमेरिका भविष्य में एकतरफा शुल्क नहीं लगाएगा या शुल्क लगाने की धमकी नहीं देगा।

इस बीच, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू की। बैठक में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन भी शामिल रहे।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में आकर ऐसे व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करे, जो भारत के दीर्घकालिक आर्थिक हितों और किसानों के भविष्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। वहीं, सरकार का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशने का प्रयास कर रहे हैं।

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