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तराई केंद्रीय वन प्रभाग में नहीं थम रहा लकड़ी माफियाओं का आतंक, अब हल्द्वानी रेंज में बेशकीमती खैर पर चली तस्करों की आरी।
रिपोर्ट तीन पेड़ों की चर्चा आठ पेड़ों की ने सच्चाई पर लगाए सवालिया निशान, जांच के बाद ही होगी तस्वीर  साफ!

दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी। तराई केंद्रीय वन प्रभाग में लकड़ी माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद नजर आ रहे हैं। ताजा मामला हल्द्वानी रेंज की बीट संख्या-162 का है, जहां बेशकीमती खैर के पेड़ों की अवैध कटान का मामला सामने आया है। घटना के बाद वन विभाग के आंकड़ों और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारियों में अंतर होने से पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वन क्षेत्राधिकारी ललित जोशी ने बताया कि विभाग को तीन खैर के पेड़ों के काटे जाने की सूचना प्राप्त हुई है। उनके अनुसार दो पेड़ों का प्रकाष्ठ तस्कर ले जाने में सफल रहे, जबकि एक पेड़ का प्रकाष्ठ वन विभाग ने मौके से बरामद कर लिया है। उन्होंने कहा कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
वहीं स्थानीय सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में तीन नहीं बल्कि आठ बेशकीमती खैर के पेड़ों का कटान हुआ है।  अवैध कटान की वास्तविक स्थिति को लेकर कई तरह की चर्चाएं क्षेत्र में चल रही हैं, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
कटे हुए पेड़ों की संख्या को लेकर उठे सवालों के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि कटान का दायरा बड़ा है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, वहीं यदि विभागीय आंकड़े सही हैं तो भ्रम की स्थिति भी दूर होनी आवश्यक है।
गौरतलब है कि हल्द्वानी रेंज पूर्व में भी अवैध कटान के मामलों को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है। ऐसे में इस प्रकरण ने एक बार फिर वन संपदा की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।
इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी ललित जोशी ने स्पष्ट कहा है कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और सच्चाई सामने लाई जाएगी।
अब सभी की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बीट संख्या-162 में खैर के वास्तव में कितने पेड़ काटे गए, वन संपदा को कितना नुकसान पहुंचा और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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