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मतदाता सत्यापन में लापरवाही का आरोप, एसडीएम से जांच की मांग!
“घर-घर सत्यापन के बजाय बुलाए जा रहे ग्रामीण,!

बीएलओ पर नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप”
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं। तहसील क्षेत्र में चल रहे मतदाता सत्यापन अभियान को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। ग्राम सूफी भगवानपुर निवासी अशोक कांडपाल ने उप जिलाधिकारी लालकुआं को शिकायत पत्र भेजकर कई बूथ लेवल अधिकारियों बीएलओ पर मतदाता सत्यापन कार्य में लापरवाही, मनमानी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर अधिकारी स्वयं गांवों में पहुंचने के बजाय लोगों को अपने तय किए गए स्थानों पर बुलाकर दस्तावेज जमा कराने और जानकारी देने के लिए कह रहे हैं। इससे सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में बीएलओ स्वयं प्रपत्र भरने के बजाय ग्राम पंचायत सदस्यों अथवा अन्य गैर-अधिकृत व्यक्तियों से यह कार्य करवा रहे हैं। इससे मतदाताओं की जानकारी गलत दर्ज होने की आशंका बढ़ गई है, जिसका खामियाजा भविष्य में आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कई ग्रामीणों को यह कहा जा रहा है कि यदि वे निर्धारित स्थान पर उपस्थित नहीं होंगे तो उन्हें बाद में तहसील के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसे आम नागरिकों पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश बताया गया है।
शिकायत पत्र में सबसे गंभीर सवाल उन दावों पर उठाया गया है जिनमें कुछ बीएलओ यह कह रहे हैं कि वे घर-घर सत्यापन के लिए गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने दरवाजा नहीं खोला। अशोक कांडपाल का कहना है कि भारतीय ग्रामीण परिवेश में जहां आज भी आपसी परिचय, सहयोग और आगंतुकों के प्रति सम्मान की परंपरा कायम है, वहां इस प्रकार का तर्क सामाजिक वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता।
उन्होंने आशंका जताई है कि कहीं वास्तविक सत्यापन किए बिना केवल औपचारिकता निभाकर रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। यदि ऐसा है तो यह पूरी मतदाता सत्यापन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
शिकायतकर्ता ने उप जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, संबंधित बीएलओ के कार्यों की समीक्षा करने तथा निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप घर-घर जाकर पारदर्शी तरीके से सत्यापन सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने का भी अनुरोध किया गया है।

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