फर्जी डिग्री से बनी प्रवक्ता पर गिरी गाज! एसआईटी जांच में खुली पोल, बर्खास्तगी की तैयारी तेज
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो देहरादून। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने के एक और बड़े मामले में शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। हरिद्वार के नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी में इतिहास की प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रेनू कुमारी की नियुक्ति एसआईटी जांच में संदिग्ध नहीं, बल्कि पूरी तरह फर्जी डिग्री के आधार पर पाई गई है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब शिक्षिका की बर्खास्तगी लगभग तय मानी जा रही है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार को तत्काल विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। एसआईटी की जांच में स्पष्ट हुआ कि शिक्षिका द्वारा प्रस्तुत एम.ए. (इतिहास) की डिग्री मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश) से जारी होना प्रमाणित नहीं हुई और इसे पूरी तरह फर्जी पाया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय प्रबंधन को समस्त अभिलेखों के साथ तलब किया है। साथ ही संबंधित प्रवक्ता को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई अब केवल औपचारिकता भर रह गई है।
बड़ा सवाल: फर्जी डिग्री से नौकरी मिली तो जिम्मेदार कौन?
यह मामला शिक्षा विभाग की सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर नियुक्ति से पहले प्रमाणपत्रों की वैधानिक जांच क्यों नहीं की गई? यदि फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति हुई तो चयन समिति, नियुक्ति प्राधिकारी और सत्यापन करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं? इस पर विभाग ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले।
उत्तराखंड में इससे पहले भी फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले कई शिक्षक अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। इसके बावजूद सत्यापन व्यवस्था में सुधार न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। शिक्षा जगत में चर्चा है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और कड़ी जांच होती तो ऐसे मामलों की नौबत ही नहीं आती।
