बिजली विभाग को उपभोक्ता आयोग का करारा झटका!
तीन फर्जी बिजली बिल रद्द, उपभोक्ता को 30 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश
लालकुआं/नैनीताल। बिजली विभाग की कथित मनमानी पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नैनीताल ने बड़ा फैसला सुनाते हुए विभाग को करारा झटका दिया है। आयोग ने उपभोक्ता हरी किशन पनेरू को जारी किए गए 18,748 रुपये, 30,044 रुपये और 55,179 रुपये के तीनों बिजली बिलों को पूरी तरह निरस्त कर दिया। इतना ही नहीं, विभाग की लापरवाही और सेवा में कमी को गंभीर मानते हुए आयोग ने विभाग को 30 हजार रुपये (20 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति एवं 10 हजार वाद व्यय) अदा करने के आदेश भी दिए हैं।
परिवादी हरी किशन पनेरू ने अधिवक्ता जयबीर सिंह एवं आदित्य कुमार के माध्यम से आयोग में परिवाद दायर कर बताया कि वह नियमित रूप से बिजली बिलों का भुगतान करते रहे, लेकिन विभाग ने बिना किसी ठोस आधार के अचानक हजारों रुपये के भारी-भरकम बिल थमा दिए। कई शिकायतों और विधिक नोटिस के बावजूद विभाग ने कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उपभोक्ता को न्याय के लिए आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वर्ष 2022 तक उपभोक्ता के बिजली बिल महज कुछ सौ रुपये आते थे, लेकिन उसके बाद विभाग ने अचानक कई गुना अधिक राशि के बिल जारी कर दिए। आयोग ने इसे बिजली विभाग की घोर लापरवाही, असावधानी और सेवा में स्पष्ट कमी माना।
250 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से बनेगा नया बिल
आयोग ने अपने आदेश में बिजली विभाग को निर्देश दिया कि 14 दिसंबर 2022 से बिजली बिलों का पुनर्गणना अधिकतम 250 रुपये प्रतिमाह के आधार पर की जाए। साथ ही उपभोक्ता द्वारा पहले जमा किए गए 9,924 रुपये और बाद में जमा किए गए 20 हजार रुपये का समायोजन कर यदि कोई अतिरिक्त राशि विभाग के पास बचती है तो उसे तत्काल उपभोक्ता को वापस लौटाया जाए।
45 दिन में पालन नहीं किया तो होगी सख्त कार्रवाई
आयोग ने विभाग को 45 दिनों के भीतर 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन नहीं किया गया तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 की धारा 71 एवं 72 के तहत विभाग के विरुद्ध वसूली, अर्थदंड और कारावास जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कुल मिलाकर यह फैसला उन हजारों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत और मिसाल है, जो गलत या मनमाने बिजली बिलों से परेशान हैं। आयोग ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी विभाग भी उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकते और लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी।
