नंदादेवी की वादियों में चहका प्रकृति का खजाना, 65 प्रजाति के पक्षियों ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की उम्मीदें!
दर्पण न्यूज 24/7 | ज्योतिर्मठ
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क से प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। लगभग तीन सप्ताह तक चले जैव विविधता अनुश्रवण अभियान में वैज्ञानिकों ने 65 प्रजातियों के दुर्लभ और महत्वपूर्ण पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की है। विशेषज्ञ इसे नंदादेवी की समृद्ध होती पारिस्थितिकी और स्वस्थ जैव विविधता का मजबूत संकेत मान रहे हैं।
सात जून से 28 जून तक चले इस विशेष अभियान में विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों और एजेंसियों के विशेषज्ञों ने लाता गांव से लेकर नंदादेवी बेस कैंप तक विस्तृत अध्ययन किया। अभियान के दौरान राज्य पक्षी मोनाल, स्नो कॉक, स्नो पाट्रिज, गोल्डन ईगल, लैमरगायर और एशी वुड पिजन समेत कुल 65 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया।
वैज्ञानिक दल का नेतृत्व कर रहे भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के पूर्व निदेशक प्रो. जी.एस. रावत ने बताया कि चार दशकों से मानव गतिविधियों से लगभग मुक्त रहे इस क्षेत्र में पक्षियों की इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति यह साबित करती है कि नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क का प्राकृतिक तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
इस बार केवल पक्षियों की सूची तैयार नहीं की गई, बल्कि उनकी संख्या का भी वैज्ञानिक आधार पर आकलन किया गया है। अब इन आंकड़ों का पिछले अनुश्रवण से मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि किन प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और किनमें बदलाव आया है। इससे भविष्य की संरक्षण रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क आज भी हिमालय की जैव विविधता का सबसे सुरक्षित आश्रय स्थल बना हुआ है। दुर्लभ पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी यह संदेश देती है कि यदि प्राकृतिक आवासों को मानवीय हस्तक्षेप से बचाया जाए तो वन्यजीव और पक्षियों की दुनिया स्वयं को पुनर्जीवित करने की अद्भुत क्षमता रखती है।
नंदादेवी की वादियों से आई यह खबर केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रकृति संरक्षण की एक प्रेरक और सकारात्मक कहानी है।
