परिवहन महकमे की नाक के नीचे चलता रहा खेल! बिना लाइसेंस ट्रैवल कारोबार ने खोली सिस्टम की पोल!
20 ट्रैवल ऑपरेटरों पर कार्रवाई, कई बसें सीज… लेकिन जनता पूछ रही है—इतने दिनों तक आखिर जिम्मेदार कौन था?
प्रमोद बमेटा | दर्पण न्यूज 24×7
हरिद्वार में परिवहन विभाग की ताजा कार्रवाई ने उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सड़क परिवहन को सुरक्षित और नियमबद्ध बनाने का दावा करती है। सोमवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर संचालित अवैध मिनी बस अड्डे के खिलाफ अभियान चलाया। कई प्राइवेट बसों को सीज किया गया, चालान काटे गए और शिवमूर्ति गली क्षेत्र में बिना वैध लाइसेंस यात्रियों की बुकिंग करने वाले 20 ट्रैवल ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई की गई।
कार्रवाई अपने आप में बड़ी है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि जब नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था, तब जिम्मेदार तंत्र आखिर कर क्या रहा था?
ऋषिकुल स्थित कश्यप धर्मशाला के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे समय से बसें खड़ी कर सवारियां भरने का सिलसिला चलता रहा। इससे हाईवे पर जाम की स्थिति बनती रही और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहा। स्थानीय लोग लगातार इस व्यवस्था से परेशान रहे। इसके बावजूद कार्रवाई तब हुई, जब मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंचा।
यहीं से जनता के सवाल शुरू होते हैं।
जनता पूछ रही है कि जब बिना लाइसेंस ट्रैवल कारोबार खुलेआम चल रहा था, तब परिवहन विभाग की निगरानी आखिर कहां थी? क्या बिना वैध लाइसेंस यात्रियों की बुकिंग का यह खेल एक-दो दिन में शुरू हुआ था, या लंबे समय से चल रहा था? यदि एक ही दिन के अभियान में 20 ट्रैवल ऑपरेटर नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़े जा सकते हैं, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
हरिद्वार की इस कार्रवाई ने यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की स्थिति हो सकती है। यदि परिवहन विभाग पूरे प्रदेश में इसी तरह का विशेष सत्यापन अभियान चलाए, तो वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
जनता यह भी जानना चाहती है कि क्या केवल चालान काट देने से व्यवस्था सुधर जाएगी, या नियमित निगरानी में हुई संभावित चूक की भी समीक्षा होगी? यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन कराना किसकी जिम्मेदारी है, और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
परिवहन विभाग की कार्रवाई निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती होनी भी चाहिए। लेकिन प्रभावी व्यवस्था वही मानी जाएगी, जहां कार्रवाई शिकायत या उच्चस्तरीय निर्देश का इंतजार न करे, बल्कि नियमित निगरानी के आधार पर समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
हरिद्वार की घटना ने एक संदेश जरूर दिया है कि कानून आज भी प्रभावी है। अब जनता की अपेक्षा है कि यह सख्ती केवल एक दिन या एक शहर तक सीमित न रहे। यदि पूरे उत्तराखंड में ट्रैवल एजेंसियों, बुकिंग कार्यालयों और अवैध पिकअप प्वाइंट का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाता है, तो न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा।
फिलहाल कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन जनता का सवाल अब भी कायम है—क्या व्यवस्था समय रहते जागेगी या हर बार किसी बड़े निर्देश का इंतजार करेगी?
