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वन अनुसंधान केंद्र का जैव विविधता मॉडल बना मिसाल, सीईसी चेयरमैन ने की सराहना।
देश के पहले पोलिनेटर पार्क समेत विभिन्न थीम आधारित उद्यानों का किया निरीक्षण।
दर्पण न्यूज 24/7ब्यूरो!
हल्द्वानी।
वन अनुसंधान केंद्र, हल्द्वानी में विकसित जैव विविधता संरक्षण एवं प्रकृति शिक्षा के विभिन्न थीम आधारित उद्यानों का शुक्रवार को केंद्रीय सशक्त समिति के चेयरमैन एवं उत्तराखंड वन विभाग के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वन अधिकारी चंद्रप्रकाश गोयल ने निरीक्षण किया। उन्होंने बायोडायवर्सिटी पार्क में विकसित संरक्षण मॉडल, विभिन्न थीम आधारित उद्यानों और अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन करते हुए इसे जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।
निरीक्षण के दौरान श्री गोयल ने भारत वाटिका, रामायण वाटिका, महाभारत वाटिका और बुद्ध वाटिका सहित एथ्नोबॉटनिकल गार्डनों का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं पौराणिक परंपराओं से जुड़े पौधों के संरक्षण की यह अवधारणा प्रकृति शिक्षा और जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने जुरासिक पार्क, इन्सेक्टिवोरस प्लांट क्षेत्र, पाम गार्डन (पामेटम) और साइकेड गार्डन का भी अवलोकन किया तथा वहां संरक्षित विभिन्न वनस्पति प्रजातियों की जानकारी ली।
भ्रमण के दौरान श्री गोयल ने देश के प्रथम पोलिनेटर पार्क का भी निरीक्षण किया। उन्होंने परागणकर्ता प्रजातियों के संरक्षण के लिए इसे अभिनव पहल बताते हुए कहा कि यह पार्क पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शोध, शिक्षा और जन-जागरूकता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने वन अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अनुसंधान सहायकों द्वारा जैव विविधता संरक्षण, अनुसंधान और प्रकृति शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास उत्तराखंड को जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रहे हैं।
इस अवसर पर उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक (अनुसंधान) विनय भार्गव सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी एवं अनुसंधान सहायक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने उन्हें बायोडायवर्सिटी पार्क में विकसित विभिन्न थीम आधारित उद्यानों तथा संरक्षण एवं अनुसंधान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

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