“प्रदेशभर में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, इलाज को त्राहिमाम… क्या 2027 से पहले चेतेगी सरकार?”
दर्पण न्यूज ब्यूरो,बैजनाथ! उत्तराखंड में सत्तारूढ़ दल भले ही 2027 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से उठ रहा जनाक्रोश इस बात का संकेत दे रहा है कि केवल दावों और नारों के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना आसान नहीं होगा।
कहीं अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, कहीं एंबुलेंस मरीजों से पहले जवाब दे रही है। पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधि आंदोलन की राह पर हैं, हल्दूचौड़ में समाजसेवी न्यायालय की शरण ले चुके हैं और अब बैजनाथ में भी जनता व विपक्ष सड़क पर उतर आया है। सवाल यह है कि जब बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है, तब विकास के दावों पर जनता कितना भरोसा करेगी?
लोकतंत्र में जनता का मिजाज ही सबसे बड़ा जनादेश लिखता है। यदि सरकार ने समय रहते स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, रोजगार और जनसुविधाओं जैसे मूल मुद्दों पर प्रभावी काम नहीं किया, तो 2027 में भारी बहुमत के दावे कहीं “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” बनकर न रह जाएं।
सत्ता के लिए यह समय आत्ममंथन का है, क्योंकि जनता अब वादों से ज्यादा काम देख रही है। चुनावी जीत का रास्ता भाषणों से नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान से होकर गुजरता है। यदि जमीनी हकीकत नहीं बदली, तो 2027 में जनता भी अपना फैसला बदलने में देर नहीं लगाएगी।
