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1100 मीटर तारबाड़ से 720 मीटर गायब।

जांच में खुली ‘बंदरबांट’ की पोल, 370 एंगल में भी 198 का हिसाब नहीं,सीएम समाधान पोर्टल की शिकायत निकली सही।

हल्दूचौड़। जिला योजना के तहत फसल सुरक्षा के नाम पर गंगापुर कबड़वाल में कराई गई तारबाड़ के कार्य में कथित ‘बंदरबांट’ का खेल जांच में सामने आया है। मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद शनिवार को मौके पर पहुंची कृषि विभाग की जांच टीम ने जब पैमाइश की तो शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए। जांच में सामने आया कि 1100 मीटर स्वीकृत तारबाड़ के सापेक्ष मौके पर महज 380 मीटर तारबाड़ ही लगी मिली, जबकि 720 मीटर तारबाड़ का कोई अता-पता नहीं मिला।

मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य एंगलों की संख्या को लेकर सामने आया। जांच टीम के मुताबिक विभाग की ओर से 370 एंगल उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन मौके पर केवल 135 एंगल ही लगे पाए गए। 37 एंगल पंचायत के गोदाम में पड़े मिले, जबकि शेष 198 एंगलों का कोई पता नहीं चल सका। जांच में सामने आए इन आंकड़ों ने पूरे कार्य की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर शिकायत संख्या CMHL-012026-11-92808 के माध्यम से गंगापुर कबड़वाल ग्राम पंचायत में कृषि एवं भूमि संरक्षण विभाग द्वारा कराए गए फसल सुरक्षा तारबाड़ कार्य में अनियमितता की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद मुख्य कृषि अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थलीय जांच कराई।

शनिवार को मुख्य कृषि अधिकारी संतोषी के नेतृत्व में जांच टीम मौके पर पहुंची। टीम में सहायक अवर अभियंता हरीश चंद्र कांडपाल तथा न्याय पंचायत प्रभारी देवयानी चौधरी मौजूद रहे। टीम ने मौके पर तारबाड़ की पैमाइश करने के साथ उपलब्ध सामग्री और संबंधित कार्य की स्थिति का भौतिक सत्यापन किया।

जांच के दौरान जब स्वीकृत और उपलब्ध कराई गई सामग्री का मौके से मिलान किया गया तो तस्वीर बेहद चौंकाने वाली सामने आई। 1100 मीटर तारबाड़ के स्थान पर सिर्फ 380 मीटर काम मिला। यानी 720 मीटर तारबाड़ मौके से गायब मिली। इसी तरह 370 एंगलों में से 135 एंगल ही लगाए गए थे। 37 एंगल पंचायत के गोदाम में मिले, जबकि 198 एंगलों का कोई हिसाब जांच टीम को मौके पर नहीं मिला।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री गई कहां? दो साल बीत जाने के बावजूद स्वीकृत कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ? और यदि सामग्री ग्रामीणों को वितरित कर दी गई थी तो उसका भौतिक सत्यापन और निगरानी किस स्तर पर की गई?

इधर ग्राम प्रधान ललित सनवाल का कहना है कि विभाग से मिली तारबाड़ ग्रामीणों को वितरित की गई है और इसकी सूची विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन जांच के दौरान सामने आई भौतिक स्थिति ने इस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि तारबाड़ वास्तव में ग्रामीणों को वितरित की गई थी तो दो साल बाद भी उसका बड़ा हिस्सा मौके पर क्यों नहीं लगा? क्या संबंधित ग्रामीणों ने सामग्री प्राप्त करने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया? यदि ऐसा है तो विभाग ने इसकी निगरानी क्यों नहीं की? और यदि सामग्री वितरित ही नहीं हुई तो वह कहां गई?

मामले का सबसे बड़ा सवाल अब कृषि एवं भूमि संरक्षण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर खड़ा हो गया है। वर्ष 2024-25 में उपलब्ध कराई गई फसल सुरक्षा तारबाड़ का कार्य दो साल बाद भी अधूरा मिला। इतने लंबे समय तक विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके पर जाकर इसकी वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं की?

मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर शिकायत पहुंचने के बाद जब जांच हुई तो स्वीकृत मात्रा और धरातल पर मौजूद कार्य के बीच भारी अंतर सामने आ गया। इससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य कृषि अधिकारी संतोषी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही है। साथ ही एमओयू की शर्तों के तहत कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है।

अब सवाल सिर्फ 720 मीटर तारबाड़ और 198 एंगलों के गायब होने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि सरकारी योजना की सामग्री की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? यदि ग्राम प्रधान का दावा सही है तो वितरण सूची के आधार पर सामग्री का सत्यापन होना चाहिए और यदि सामग्री वितरित नहीं हुई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है?

फिलहाल जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजे जाने के बाद अब कार्रवाई का इंतजार है। जांच में सामने आए आंकड़े सरकारी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।

फोटो। जांच के दौरान ग्राम प्रधान से जानकारी लेती मुख्य कृषि अधिकारी।

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