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धुरंधर धामी की विधानसभा में स्वास्थ्य व्यवस्था धड़ाम!
अस्पताल में तीन वाहन खड़े, चलाने वाला एक भी नहीं… मरीजों की सेवा पर सिस्टम बेबस!

दर्पण न्यूज 24/7 टनकपुर।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा क्षेत्र टनकपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच उप जिला अस्पताल की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अस्पताल में तीन वाहन उपलब्ध होने के बावजूद इन्हें चलाने के लिए एक भी चालक तैनात नहीं है। ऐसे में मरीजों की सुविधा और अस्पताल के जरूरी कामकाज के लिए उपलब्ध वाहन महज खड़े रहने तक सीमित हो गए हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एंबुलेंस की है। करीब पांच वर्ष पहले अस्पताल को उपलब्ध कराई गई यह एंबुलेंस आपात स्थिति में गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी गई थी। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस में कोई तकनीकी खराबी नहीं है, लेकिन चालक के अभाव में यह जून से अस्पताल परिसर में खड़ी है।
अधीक्षक का वाहन भी खड़ा
चालक की कमी का असर केवल एंबुलेंस तक सीमित नहीं है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का वाहन भी चालक के अभाव में संचालित नहीं हो पा रहा है। तीसरा वाहन भी इसी समस्या के चलते उपयोग में नहीं है। यानी अस्पताल में वाहन तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए कर्मचारी नहीं।
सेवानिवृत्ति के बाद नहीं हुई वैकल्पिक व्यवस्था
अस्पताल के सीएमएस डॉ. घनश्याम तिवारी के मुताबिक अस्पताल में तैनात चालक धर्मवीर 31 मई को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद से किसी नए चालक की तैनाती नहीं हो सकी है। इसका असर अस्पताल के दैनिक कार्यों पर भी पड़ रहा है। दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था समेत कई कामों के लिए अस्पताल को वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री की विधानसभा में व्यवस्था पर सवाल
टनकपुर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा का हिस्सा है। ऐसे में अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के संचालन के लिए चालक तक की व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब मामला मरीजों की जिंदगी से जुड़ी बीएलएस एंबुलेंस का हो।
सवाल यह भी है कि किसी चालक के सेवानिवृत्त होने के बाद उसकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था करने में महीनों क्यों लग रहे हैं? यदि एंबुलेंस उपलब्ध है और तकनीकी रूप से दुरुस्त है तो आपात स्थिति में मरीजों को इसका लाभ कैसे मिलेगा?
सीएमओ बोले—प्रक्रिया जारी
सीएमओ डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि टनकपुर उप जिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अस्पताल में बीएलएस एंबुलेंस समेत तीन वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन फिलहाल इनके संचालन के लिए चालक नहीं है। चालक की तैनाती के लिए प्रक्रिया चल रही है और इस संबंध में महानिदेशक से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।
सवाल यह कि तब तक एंबुलेंस किस काम की?
स्वास्थ्य सेवाओं में आपातकालीन एंबुलेंस की भूमिका सबसे अहम होती है। मरीज को एंबुलेंस की जरूरत उस समय पड़ती है, जब हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में महीनों से चालक के अभाव में खड़ी बीएलएस एंबुलेंस सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उस तस्वीर को सामने ला रही है, जिसमें संसाधन उपलब्ध कराने के बाद उनके संचालन की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया।
जनता का सवाल: मुख्यमंत्री की विधानसभा में जब अस्पताल के पास एंबुलेंस सहित तीन वाहन मौजूद हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाला एक भी चालक नहीं है, तो स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत क्या मानी जाये।

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