खबरें शेयर करें -

 

हाईकोर्ट के सख्त तेवर: खटीमा पालिकाध्यक्ष और ईओ तलब, समान वेतन पर 13 याचिकाओं का निस्तारण; उपपा अध्यक्ष को हिरासत में लेने पर सरकार से जवाब तलब!

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए नगर पालिका खटीमा में ठेकेदारों के पंजीकरण, संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों के समान कार्य-समान वेतन और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

खटीमा पालिकाध्यक्ष और ईओ को 22 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश

नगर पालिका परिषद खटीमा में ठेकेदारों के पंजीकरण और विभिन्न ठेकों में भागीदारी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को 22 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

खटीमा निवासी विक्रम सिंह चौहान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिशासी अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं, जबकि पालिका अध्यक्ष के शहर से बाहर होने के कारण वह कोर्ट में पेश नहीं हो सके। इस पर अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तिथि निर्धारित करते हुए नगर पालिका से कई बिंदुओं पर शपथपत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

खंडपीठ ने पूछा है कि 16 जुलाई 2023 को सार्वजनिक सूचना के लिए प्रकाशित की गई ड्राफ्ट उपविधियां क्या अब अंतिम रूप ले चुकी हैं। यदि उपविधियां अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सकी हैं तो ठेकेदारों का पंजीकरण आखिर किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है।

अदालत ने नगर पालिका से यह भी जवाब मांगा है कि इस वर्ष जारी होने वाले ठेकों में केवल वर्ष 2023-24 तक पंजीकृत ठेकेदारों को ही भाग लेने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। इसके अलावा कोर्ट ने छह अप्रैल को जारी आदेश के अनुपालन में नगर पालिका परिषद की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है।

खंडपीठ ने उस मामले में भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है, जिसमें नगर पालिका की ओर से पूर्व की रिट याचिका में यह कहा गया था कि याचिकाकर्ता पहले से पंजीकृत है और उसका नाम केवल राजपत्र में अधिसूचित किया जाना शेष है। अदालत ने पूछा है कि इस संबंध में नगर पालिका की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

समान कार्य-समान वेतन से जुड़ी 13 याचिकाओं का निस्तारण

एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने संविदा पर कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों की समान कार्य-समान वेतन की मांग से जुड़ी 13 याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायत के संबंध में व्यक्तिगत रूप से प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए संबंधित अधिकारी को प्रत्यावेदन प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे अन्य कार्मिकों के समान कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें भी ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत के आधार पर समान पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए। ये याचिकाकर्ता उत्तरकाशी जिले के मोरी स्थित ब्लॉक रिसोर्स सेंटर में उत्तराखंड समग्र शिक्षा के तहत संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार उन्हें वर्ष 2013 में 5,500 रुपये मासिक समेकित मानदेय पर नियुक्त किया गया था, जो वर्तमान में बढ़कर 18,000 रुपये प्रतिमाह हो गया है। उन्होंने उपनल के माध्यम से नियुक्त डाटा एंट्री ऑपरेटरों को मिल रहे 27,299.63 रुपये मासिक पारिश्रमिक के बराबर वेतन दिए जाने की मांग की है।

हाईकोर्ट ने सभी 13 याचिकाओं का अंतिम रूप से निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ताओं को दस दिनों के भीतर व्यक्तिगत प्रत्यावेदन दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारी को इन प्रत्यावेदनों पर आठ सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप निर्णय लेने को कहा है।

प्रभात ध्यानी को ट्रेन से हिरासत में लेने पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

उधर, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से 19 जुलाई की शाम पुलिस द्वारा कथित रूप से ट्रेन के डिब्बे से जबरन हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर ले जाने के मामले में भी हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रभात ध्यानी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के तहत कार्रवाई की गई है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने सभी राज्यों को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाने वाले लोगों को संबंधित राज्य की सीमा में रोकने की बात कही गई थी।

इस पर हाईकोर्ट ने सरकार और पुलिस से कई महत्वपूर्ण सवाल किए। अदालत ने पूछा कि पुलिस को कैसे पता चला कि प्रभात ध्यानी दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे? उन्हें किस नियम और किस अपराध के तहत ट्रेन से हिरासत में लिया गया? अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस तरह की कार्रवाई नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन नहीं है, क्योंकि एक नागरिक को देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

इन तीनों मामलों में हाईकोर्ट के रुख से स्पष्ट है कि अदालत ने जहां एक ओर स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली और ठेकेदारों के पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है, वहीं संविदा कर्मियों के समान कार्य-समान वेतन के अधिकार और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में भी संबंधित अधिकारियों से कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

 

उत्तराखंड