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एक अपील ने जगा दी इंसानियत, गौलापार हादसे में उजड़े परिवार के लिए जुटे 11.75 लाख!

समाजसेवी शुभम अंडोला की पहल बनी उम्मीद की किरण, मदद को आगे आए लोग, हेमंत मेहरा ने मासूम की पांच साल की पढ़ाई का उठाया जिम्मा!

प्रमोद बमेटा दर्पण न्यूज 24/7।लालकुआं।

कभी-कभी किसी की जिंदगी में आया अंधेरा दूर करने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बस एक संवेदनशील दिल और मदद के लिए उठी एक आवाज की जरूरत होती है। गौलापार हादसे में अपना सब कुछ खोकर मुश्किल दौर से गुजर रहे एक परिवार के लिए समाजसेवी शुभम अंडोला की एक छोटी-सी अपील ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। पीड़ित परिवार का दर्द देखकर शुभम अंडोला ने लोगों से आगे आने की अपील की तो देखते ही देखते मदद के लिए हाथ बढ़ते चले गए। देखते ही देखते यह पहल एक ऐसी मानवीय मुहिम में बदल गई, जिसने परिवार को 11 लाख 75 हजार रुपये की आर्थिक मदद के साथ यह भरोसा भी दिया कि वे इस कठिन समय में अकेले नहीं हैं।

मुहिम की शुरुआत शुभम अंडोला और उनके परिवार ने स्वयं दो लाख रुपये की सहायता देकर की। इसके बाद उनके मित्र एडवोकेट प्रकाश सनवाल ने 50 हजार और अंकित अग्रवाल ने भी 50 हजार रुपये का सहयोग दिया। फिर समाज के लोगों ने इस दर्द को अपना दर्द समझा और सहायता का सिलसिला बढ़ता चला गया। किसी ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग दिया तो किसी ने अपनी छोटी-सी बचत में से हिस्सा निकालकर पीड़ित परिवार के लिए भेज दिया।

शुभम अंडोला की पहल के माध्यम से 6 लाख 75 हजार रुपये परिवार को दिए गए। वहीं 3 लाख 50 हजार रुपये नकद सहयोग के रूप में जुटे, जबकि 1 लाख 50 हजार रुपये क्यूआर कोड के माध्यम से लोगों ने सीधे सहायता के रूप में भेजे। इस तरह कुल 11 लाख 75 हजार रुपये की सहायता पीड़ित परिवार तक पहुंची।

लेकिन इस पूरी मुहिम की सबसे मार्मिक और दिल को छू लेने वाली तस्वीर उस समय सामने आई, जब हेमंत मेहरा ने परिवार के एक मासूम बच्चे के भविष्य को लेकर बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने का संकल्प लिया। उन्होंने बच्चे की पढ़ाई के लिए अगले पांच वर्षों तक हर महीने तीन हजार रुपये देने की घोषणा की। यह सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उस मासूम के सपनों को टूटने से बचाने की एक कोशिश है। हादसे ने जिस परिवार का वर्तमान छीन लिया, समाज की संवेदना अब उसके बच्चे के भविष्य को संवारने का संकल्प बन गई है।

शुभम अंडोला कहते हैं कि इस पूरी मुहिम में वे स्वयं को सिर्फ एक माध्यम मानते हैं। असली ताकत उन लोगों की है, जिन्होंने किसी अनजान परिवार के दर्द को अपना दर्द समझा और बिना किसी स्वार्थ के मदद के लिए आगे आए। उनके अनुसार, समाजसेवा किसी पद, पहचान या प्रचार की मोहताज नहीं होती। जरूरत सिर्फ इतनी है कि किसी के दर्द को महसूस किया जाए और जब संभव हो, तब उसका हाथ थाम लिया जाए।

पिछले कई वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाजसेवा के प्रयासों में जुटे शुभम अंडोला की यह पहल अब केवल एक परिवार की मदद की कहानी नहीं रही। यह उस भरोसे की कहानी बन गई है, जो बताती है कि विपत्ति के समय समाज अगर एकजुट हो जाए तो किसी टूटे हुए परिवार को फिर से खड़े होने की ताकत दी जा सकती है।

गौलापार हादसे ने एक परिवार से उसकी खुशियां छीन लीं, लेकिन उसी दर्द के बीच समाज ने मानवता का ऐसा चेहरा भी दिखाया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एक छोटी-सी अपील से शुरू हुई मुहिम ने 11.75 लाख रुपये का सहारा दिया और एक मासूम के भविष्य को पांच वर्षों तक सुरक्षित करने का संकल्प भी दिलाया।

शायद यही इंसानियत की सबसे खूबसूरत तस्वीर है—जब किसी की आंखों में आंसू हों तो कोई अनजान भी अपना बनकर खड़ा हो जाए, जब किसी का घर उजड़ जाए तो पूरा समाज उसके सहारे की दीवार बन जाए और जब किसी बच्चे का भविष्य अंधेरे में दिखाई दे तो कोई उसके सपनों के लिए रोशनी बन जाए।

शुभम अंडोला की पहल और समाज के सहयोग ने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है… बस उसे जगाने के लिए किसी एक संवेदनशील आवाज की जरूरत होती है।