झिरना में रेस्क्यू किए गए हाथी के नन्हे शावक को मिला परिवार, मां ने देखते ही अपनाया, पूरा झुंड लेकर जंगल की ओर निकला!
दर्पण न्यूज 24×7 संवाददाता
करन तिवारी, रामनगर
रामनगर। झिरना के जंगल में कुछ दिन पहले अकेला मिला हाथी का नन्हा शावक अब अपनी मां की गोद और अपने झुंड के बीच सुरक्षित है। चोटिल हालत में मिले इस मासूम को कॉर्बेट प्रशासन ने रेस्क्यू कर उपचार दिया और लगातार निगरानी रखी। आखिरकार वन विभाग की मेहनत रंग लाई और शावक को उसकी मां तथा झुंड से मिला दिया गया। मां ने भी अपने बच्चे को देखते ही अपना लिया। इसके बाद पूरा झुंड उसे अपने साथ लेकर जंगल की ओर रवाना हो गया।
झिरना रेंज के ग्रासलैंड क्षेत्र में गश्त के दौरान वनकर्मियों को हाथी का यह बच्चा अकेला मिला था। आसपास हाथियों का कोई झुंड नहीं था और शावक के शरीर पर मामूली चोटों के निशान भी थे। वनकर्मियों ने बिना देर किए उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया और झिरना कैंप परिसर में लाकर उपचार शुरू किया।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह के अनुसार, शावक को प्राथमिक उपचार देने के साथ ही नियमित भोजन और विशेष देखभाल की गई। लगातार निगरानी में उसकी सेहत में सुधार होता गया। लेकिन वन विभाग की प्राथमिकता केवल उसका उपचार करना नहीं, बल्कि उसे उसकी मां और प्राकृतिक परिवार तक सुरक्षित पहुंचाना था।
इसके लिए वन विभाग की टीम ने लगातार उस क्षेत्र पर नजर बनाए रखी, जहां हाथियों का झुंड विचरण कर रहा था। इस दौरान शावक की मां भी झुंड के साथ कैंप के आसपास मौजूद रही। सही समय और सुरक्षित परिस्थितियां मिलने पर वनकर्मियों ने शावक को कैंप से बाहर छोड़ा।
जैसे ही शावक खुले जंगल में पहुंचा, वह अपनी मां के करीब गया और मां ने उसे तुरंत अपने साथ स्वीकार कर लिया। इसके बाद झुंड ने भी उसे अपने बीच शामिल कर लिया और नन्हे शावक को साथ लेकर जंगल की ओर बढ़ गया। यह दृश्य वनकर्मियों के लिए भी बेहद भावुक और संतोषजनक रहा।
पार्क वार्डन ने बताया कि रेस्क्यू अभियान पूरी तरह सफल रहा है और हाथी का बच्चा अब अपनी मां और झुंड के साथ सुरक्षित है। हालांकि कॉर्बेट प्रशासन अभी भी पूरे झुंड की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है, ताकि शावक के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर नजर बनी रहे।
कॉर्बेट प्रशासन की यह सफलता वन्यजीव संरक्षण के मानवीय और संवेदनशील पहलू को सामने लाती है। समय पर रेस्क्यू, उपचार और वैज्ञानिक निगरानी के जरिए एक नन्हे वन्यजीव को न केवल जीवनदान मिला, बल्कि उसे उसका परिवार भी वापस मिल गया। जंगल में लौटते इस शावक की कहानी यह संदेश भी देती है कि वन्यजीव संरक्षण का सबसे बड़ा उद्देश्य उन्हें बचाकर उनके प्राकृतिक संसार में सुरक्षित लौटाना है।
कुल मिलाकर झिरना के जंगल में अकेला मिला हाथी का नन्हा शावक अब फिर अपनी मां और पूरे झुंड के बीच है। चोटिल हालत में मिले शावक का कॉर्बेट प्रशासन ने उपचार किया, लगातार निगरानी रखी और सही समय पर उसे उसकी मां के पास पहुंचाया। मां ने भी अपने बच्चे को देखते ही अपना लिया और पूरा झुंड उसे साथ लेकर जंगल की ओर रवाना हो गया। वन्यजीव संरक्षण की यह तस्वीर बताती है कि इंसान और प्रकृति के बीच संवेदनशीलता का रिश्ता कितना खूबसूरत हो सकता है।
