

लालकुआं में बिष्ट की जमीन पर उठे सवाल, नए दावेदारों की दस्तक से गरमाई भाजपा की सियासत!
2022 की बड़ी जीत के बावजूद 2027 की राह आसान नहीं? नए चेहरों की सक्रियता, कथित सर्वे और कोश्यारी फैक्टर ने बढ़ाई हलचल!
लालकुआं।
2022 में कांग्रेस के दिग्गज हरीश रावत को 17,527 वोट के बड़े अंतर से हराकर विधानसभा पहुंचे डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के सामने 2027 की सियासी राह अब उतनी सीधी नजर नहीं आ रही है। पांच साल के कार्यकाल के बीच जहां विधायक अपने विकास कार्यों और जनता के भरोसे को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रहे हैं, वहीं लालकुआं भाजपा में नए चेहरों की बढ़ती सक्रियता ने टिकट की राजनीति को गर्म कर दिया है।
मौजूदा विधायक के लिए सबसे बड़ा सवाल चुनाव मैदान का नहीं, बल्कि उससे पहले टिकट का है।
2022 में 46,307 वोट हासिल कर 53.2 प्रतिशत वोट शेयर के साथ बड़ी जीत दर्ज करने वाले बिष्ट के सामने अब पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों की चुनौती है।
एक तरफ विधायक का दावा, दूसरी तरफ नए चेहरों की दस्तक!
डॉ. मोहन सिंह बिष्ट साफ कह रहे हैं कि उनकी सबसे बड़ी ताकत विकास कार्य और जनता का विश्वास है। टिकट को लेकर भी उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व जो फैसला करेगा, वह स्वीकार होगा और निर्दलीय चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं उठता।
लेकिन राजनीति में केवल मौजूदा विधायक का दावा ही कहानी तय नहीं करता।
लालकुआं में कई भाजपा नेताओं की सक्रियता और संभावित दावेदारी की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के भतीजे और भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दीपेंद्र कोश्यारी की सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को खासा बढ़ाया है। हाल में उनके जन्मदिन के अवसर पर लालकुआं, बिंदुखत्ता और गौलापार में हुए कार्यक्रमों को भी उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से जोड़कर देखा गया।
क्या बदल रहा है लालकुआं का सियासी गणित?
यही वह सवाल है जो मौजूदा विधायक के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में उभर रहा है।
2022 की जीत निश्चित रूप से बिष्ट की मजबूत चुनावी स्थिति को दर्शाती है। लेकिन 2027 का चुनाव अलग परिस्थितियों में होगा। इस बार मुकाबला केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर संभावित टिकट दावेदारों से भी है।
पार्टी के अंदर कथित आंतरिक सर्वे को लेकर सामने आई चर्चाओं में लालकुआं विधायक का नाम भी शामिल किया गया है। इन चर्चाओं में स्थानीय स्तर पर असंतोष को संभावित कारणों में गिनाया गया है। हालांकि भाजपा की ओर से ऐसी किसी कथित सर्वे रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यानी सर्वे की चर्चा है, लेकिन आधिकारिक तस्वीर अभी साफ नहीं है।
बिष्ट बोले—निर्दलीय नहीं लड़ूंगा !
इन तमाम चर्चाओं के बीच डॉ. मोहन सिंह बिष्ट का बयान महत्वपूर्ण हो जाता है।
उनका कहना है कि भाजपा नेतृत्व पर उन्हें पूरा भरोसा है। पार्टी जो निर्णय करेगी, वह स्वीकार होगा। निर्दलीय चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं उठता।
राजनीतिक तौर पर इस बयान के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। एक तरफ यह संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संकेत है, तो दूसरी तरफ यह भी साफ करता है कि टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वह पार्टी नेतृत्व के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
कोश्यारी फैक्टर ने बढ़ाई उत्सुकता !
लालकुआं की राजनीति में अब भगत सिंह कोश्यारी का नाम भी फिर चर्चा के केंद्र में है।
उनके भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी की क्षेत्र में सक्रियता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भाजपा 2027 में लालकुआं से नए चेहरे पर विचार कर सकती है। अभी भाजपा ने न तो दीपेंद्र कोश्यारी को प्रत्याशी बनाया है और न ही किसी अन्य नाम पर आधिकारिक मुहर लगाई है।
लेकिन राजनीति में चुनाव से महीनों पहले होने वाली गतिविधियां भी संकेतों की भाषा बोलती हैं।
दीपेंद्र की लगातार सक्रियता को इसी नजर से देखा जा रहा है।
क्या 2022 का प्रदर्शन ही टिकट की गारंटी बनेगा?
यही लालकुआं भाजपा की सबसे बड़ी पहेली है।
बिष्ट के पास 2022 की बड़ी जीत का मजबूत रिकॉर्ड है। उनके पक्ष में संगठन का अनुभव और विधायक के रूप में कार्यकाल है। दूसरी ओर नए दावेदारों के पास अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने का अवसर है।
ऐसे में पार्टी के सामने संभावित रूप से कई सवाल होंगे!
मौजूदा विधायक का प्रदर्शन कितना संतोषजनक है?
क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता कैसी है?
संगठन के भीतर उनकी स्थिति क्या है?
नए चेहरे की संभावना से पार्टी को क्या लाभ या चुनौती हो सकती है?
और सबसे अहम 2027 में लालकुआं के लिए भाजपा किस राजनीतिक समीकरण को प्राथमिकता देती है?
जनता के बीच मौजूदगी, लेकिन सवाल भी मौजूद!
हाल के दिनों में विधायक की ओर से जनता की समस्याएं सुनने और अधिकारियों को सड़क, पानी व बिजली जैसी समस्याओं के समाधान के निर्देश देने की गतिविधियां भी सामने आई हैं।
इससे साफ है कि विधायक सक्रिय हैं। लेकिन राजनीतिक सक्रियता और टिकट की दावेदारी दो अलग-अलग कसौटियां हैं।
लालकुआं की राजनीति में अब असली परीक्षा यही होगी कि विधायक अपने विकास कार्यों को कितनी मजबूती से जनता के बीच ले जा पाते हैं और भाजपा के भीतर उभर रही संभावित दावेदारियों के बीच अपना राजनीतिक आधार कितना कायम रख पाते हैं।
फिलहाल मुकाबला टिकट का है, चुनाव का नहीं
लालकुआं में 2027 की लड़ाई अभी मैदान में नहीं उतरी है, लेकिन भाजपा के भीतर उसकी पटकथा जरूर लिखी जाने लगी है।
एक तरफ 2022 की बड़ी जीत के साथ मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट हैं। दूसरी तरफ नए चेहरों की सक्रियता है। बीच में संगठन का सर्वे, स्थानीय समीकरण और पार्टी नेतृत्व का निर्णय है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि बिष्ट की जमीन खिसक गई है। लेकिन इतना जरूर है कि जिस सीट पर 2022 में उनकी जीत बेहद मजबूत रही थी, वहां 2027 के लिए राजनीतिक जमीन अब निर्विवाद नहीं दिखाई दे रही।
और यही लालकुआं की भाजपा राजनीति की सबसे बड़ी कहानी बनती जा रही है!
क्या बिष्ट अपनी जमीन बचा पाएंगे, या नए दावेदारों की दस्तक से भाजपा की सियासी जमीन का नक्शा बदल जाएगा?
