








दावों की चमक के पीछे स्वास्थ्य व्यवस्था का दर्द, हल्दूचौड़ सीएचसी में मरीज बेहाल!
तीन घंटे की कतार में बीमारी से जूझते बुजुर्ग, गोद में बच्चों को लिए खड़ी महिलाएं; दो डॉक्टरों के भरोसे दिखी ओपीडी!
हल्दूचौड़। सोमवार को हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में कदम रखते ही एक दृश्य ठिठकने को मजबूर कर रहा था। लंबी कतार में बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को लेकर आए परिजन अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। किसी बुजुर्ग के चेहरे पर बीमारी की थकान थी तो कोई दीवार का सहारा लेकर खड़ा था। गोद में बच्चा लिए महिलाएं बार-बार कतार की ओर देख रही थीं कि शायद अब नंबर आने वाला है।
घड़ी की सुइयां आगे बढ़ती रहीं, लेकिन कतार धीरे-धीरे ही खिसक रही थी। कई मरीजों ने बताया कि वे करीब तीन घंटे से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इंतजार बढ़ा तो बेचैनी भी बढ़ने लगी। कुछ लोग बार-बार आगे झांककर पूछते दिखे—“नंबर अभी कितना दूर है?”
भीड़ बढ़ने पर स्थिति ऐसी हुई कि जल्द डॉक्टर को दिखाने की कोशिश में मरीजों और तीमारदारों के बीच धक्का-मुक्की तक होने लगी। बीमारी से परेशान लोगों के चेहरों पर इलाज की जल्दी और लंबे इंतजार की थकान साफ दिखाई दे रही थी।
ओपीडी में उस समय बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर कन्याल और चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्णिका पंत मरीजों को देखते नजर आए। मरीजों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध चिकित्सकों की कमी का असर ओपीडी की व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा था।
यह सिर्फ कतार नहीं, लोगों की मजबूरी थी।
कतार में खड़े एक बुजुर्ग को कुछ देर बाद बैठने की जगह तलाशनी पड़ी। एक महिला बच्चे को गोद में संभालते हुए उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी। आसपास खड़े परिजन कभी पानी पिला रहे थे तो कभी बच्चे को गोद में लेकर मां को कुछ देर आराम देने की कोशिश कर रहे थे।
इन छोटे-छोटे दृश्यों में सरकारी अस्पताल आने वाले आम आदमी की पूरी कहानी दिखाई दे रही थी।
बीमार शरीर पहले बीमारी से लड़ रहा था और फिर व्यवस्था के इंतजार से।
सीएचसी के आलीशान भवन और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सरकारी तस्वीर देखकर मरीज यहां उम्मीद लेकर आते हैं। लेकिन ओपीडी में डॉक्टर के लिए लंबी कतार उस उम्मीद को सवाल में बदल देती है।
मरीजों की जुबान पर यही सवाल था—“जब इतनी बड़ी बिल्डिंग बना दी गई है तो मरीजों को देखने के लिए पर्याप्त डॉक्टर क्यों नहीं हैं?”
स्वास्थ्य सेवा की असली परीक्षा भवन, बोर्ड या दावों में नहीं, बल्कि उस पल होती है जब कोई बीमार व्यक्ति अस्पताल की ओपीडी में पहुंचता है और उसे डॉक्टर तक पहुंचने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों और सिस्टम को आईना दिखा रही हैं सीएचसी की व्यवस्थाएं


हल्दूचौड़ सीएचसी आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। ऐसे में चिकित्सकों और जरूरी स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था केवल स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि आम जनता की बुनियादी जरूरत है।
लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में जनकल्याण और विकास के दावों के बीच यह दृश्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने भी सवाल रखता है—क्या अस्पताल की इमारत के साथ उसमें पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता बनेगा?
सोमवार को अस्पताल में खड़े लोग किसी से एहसान नहीं मांग रहे थे। उन्हें सिर्फ समय पर डॉक्टर चाहिए था।
गोद में बीमार बच्चे, सहारे के लिए दीवार पकड़ते बुजुर्ग और तीन घंटे से अपनी बारी का इंतजार करती कतार—हल्दूचौड़ सीएचसी की यह तस्वीर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से किसी भाषण की नहीं, जवाब की मांग कर रही थी।
