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हाईकोर्ट के तीन बड़े फैसले: फांसी की सजा बदली उम्रकैद में, बडोला हत्याकांड में आरोपी को जमानत नहीं, गंगा घाटों की सुरक्षा पर भी सख्ती!

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए। रुड़की की युवती हत्याकांड में मुख्य आरोपी हैदर की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। वहीं देहरादून के चर्चित दीपक बडोला हत्याकांड में मुख्य आरोपी मनीष कुमार सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। इसके अलावा टिहरी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने जिलाधिकारी को विस्तृत प्रत्यावेदन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

फांसी की सजा पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, हैदर को अब उम्रकैद!

रुड़की में वर्ष 2021 में शादी से इनकार करने के बाद युवती की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने अपर जिला न्यायाधीश रुड़की के मृत्युदंड के फैसले को बदल दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मुख्य आरोपी हैदर की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि अपराध गंभीर और जघन्य है, लेकिन यह मामला मृत्युदंड के लिए निर्धारित ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी में नहीं आता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि करने से इनकार करते हुए उसे उम्रकैद में बदल दिया।

मामले के अनुसार, वर्ष 2021 में गंगनहर थाना क्षेत्र में मृतका के भाई दिनेश ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि हैदर युवती पर शादी के लिए दबाव बनाता था। परिजनों की गैरमौजूदगी में हैदर अपने दो साथियों के साथ घर में घुसा और धारदार हथियार से युवती की हत्या कर दी।

निचली अदालत ने 13 गवाहों के बयानों के आधार पर 12 जून 2025 को हैदर को फांसी और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी, जबकि दूसरे आरोपी रिहान को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।हाईकोर्ट ने हैदर और रिहान की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।

दीपक बडोला हत्याकांड: मुख्य आरोपी को जमानत नहीं!

देहरादून के रायपुर क्षेत्र में जून 2024 में हुए चर्चित गोलीकांड और दीपक बडोला की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी मनीष कुमार सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले को गंभीर, सुनियोजित और संगठित अपराध से जुड़ा माना। अदालत ने कहा कि अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिलने के आधार पर मनीष को भी समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी आया कि आरोपी की वारदात और बाद में हुई पुलिस मुठभेड़ में सक्रिय भूमिका बताई गई है तथा उसकी निशानदेही पर हथियार बरामद होने की बात सामने आई है।

हालांकि, अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी जून 2024 से जेल में है और मामले के 39 गवाहों में अभी तक केवल एक की गवाही पूरी हुई है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के नौ महीने के भीतर मुकदमे का ट्रायल पूरा करने का प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

गंगा घाटों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त!

टिहरी गढ़वाल के तपोवन स्थित साईं घाट, नीम बीच, हनुमान घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़े मामले में भी हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने हरिद्वार निवासी राज तेहरान की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को 10 दिन के भीतर घाटों की कमियों और सुरक्षा संबंधी मांगों का विस्तृत प्रत्यावेदन जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को देने को कहा है।

कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि प्रत्यावेदन प्राप्त होने के बाद श्रद्धालुओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आठ सप्ताह के भीतर नियमानुसार निर्णय लेकर आदेश पारित किया जाए।

अदालत ने राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट किया कि गंगा घाटों पर जनसुरक्षा के इंतजाम लगातार बेहतर किए जाने की जरूरत है। जलस्तर में बदलाव के अनुसार बैरीकेडिंग और पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाने पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

तीनों मामलों में हाईकोर्ट के आदेश एक बात साफ करते हैं—जहां आपराधिक मामलों में अदालत ने सजा और जमानत पर महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, वहीं गंगा घाटों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही पर भी न्यायालय ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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