

देवभूमि में ‘ओवररेट’ का खेल! अफसरों की दस्तक ने खोली शराब कारोबार की परतें!
भवाली में एसडीएम को ही अधिक दाम पर शराब बेचने का वीडियो वायरल, लालकुआं में भी देर रात पकड़ी गई ओवररेटिंग, देहरादून की छापेमारी में भी सामने आईं कई गड़बड़ियां!
दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो।
नैनीताल। देवभूमि में शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली यानी ओवररेटिंग का मुद्दा एक बार फिर आबकारी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। हाल के घटनाक्रमों में तस्वीर यह सामने आई है कि जिन दुकानों की निगरानी आबकारी तंत्र को नियमित रूप से करनी चाहिए, वहां अनियमितताओं का खुलासा कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की औचक कार्रवाई में हो रहा है।
भवाली का एक वीडियो इन दिनों वायरल है, जिसमें दुकान पर शराब की बोतल और लेन-देन का दृश्य दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि एसडीएम के स्तर से ग्राहक बनकर की गई जांच के दौरान शराब निर्धारित कीमत से अधिक में बेचने का मामला सामने आया। वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य को लेकर संबंधित दुकान और प्रशासनिक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अलग से महत्वपूर्ण होगी।
नैनीताल जिले में भवाली और लालकुआं में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान ओवररेटिंग से जुड़ी शिकायतें और अनियमितताएं सामने आने की खबरें भी सामने आई हैं। भवाली में निरीक्षण के दौरान निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बिक्री और रेट लिस्ट प्रदर्शित न होने की बात सामने आई।
लालकुआं में भी देर रात खुला ‘रेट’ का खेल
इधर लालकुआं-हल्दूचौड़ क्षेत्र में भी देर रात प्रशासनिक टीम ने शराब दुकानों की जांच की। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार एसडीएम रेखा कोहली और तहसीलदार ईश्वर सिंह भीमा के नेतृत्व में दुकानों की जांच की गई और ओवररेटिंग को लेकर कार्रवाई की गई।
यानी सवाल सिर्फ एक दुकान का नहीं है। जब अधिकारी स्वयं ग्राहक बनकर या अचानक दुकान पर पहुंचकर निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली पकड़ रहे हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?
देहरादून में भी डीएम की कार्रवाई ने खोली कई परतें
इससे पहले देहरादून में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर देर रात अलग-अलग मजिस्ट्रेट टीमों ने शराब दुकानों पर छापेमारी की। जांच में ओवररेटिंग, स्टॉक रजिस्टर अपडेट न होना, अनधिकृत सेल्समैन, रेट लिस्ट का प्रदर्शित न होना और शिकायत नंबर तक उपलब्ध न होने जैसी अनियमितताएं सामने आईं। आईएसबीटी क्षेत्र की एक दुकान पर ओवररेटिंग की शिकायत की पुष्टि हुई और 42 बोतलों के बैच नंबर अभिलेखों से मेल नहीं खाने की बात भी सामने आई हैं।
राजधानी से पहाड़ और मैदान तक एक ही सवाल—निगरानी कौन कर रहा है?
देहरादून से लेकर नैनीताल जिले के भवाली और लालकुआं तक सामने आए ये मामले शराब कारोबार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सवाल यह नहीं कि प्रशासन ने छापे क्यों मारे, बल्कि सवाल यह है कि अगर प्रशासन की एक रात की औचक कार्रवाई में इतनी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं, तो नियमित आबकारी निरीक्षण में ये सब क्यों नहीं दिखता?
उपभोक्ताओं की ओर से यह शिकायत भी सामने आती रही है कि ओवररेटिंग की शिकायत के लिए जिम्मेदार आबकारी अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार फोन नहीं उठते। यदि यह शिकायतें सही हैं तो यह व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। यहां आबकारी विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायतों के लिए उपलब्ध नंबर कितने सक्रिय हैं, कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं और उन पर कितनी कार्रवाई हुई।
‘रेट लिस्ट’ दुकान पर, लेकिन कीमत तय कौन करता है?
शराब की दुकान पर निर्धारित मूल्य प्रदर्शित करना और उसी मूल्य पर बिक्री कराना उपभोक्ता के अधिकार और नियामकीय व्यवस्था का हिस्सा है। इसके बावजूद अगर ग्राहक को बोतल पर अंकित/निर्धारित मूल्य से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है और शिकायत के बाद प्रशासन को खुद मैदान में उतरना पड़ रहा है, तो आबकारी निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाजिमी है।
ओवररेटिंग सिर्फ कुछ रुपये की अतिरिक्त वसूली नहीं है—यह सवाल है कि सरकारी नियंत्रण में चल रहे शराब कारोबार में नियम लागू कौन करा रहा है और उसकी निगरानी कौन कर रहा है?
अब जरूरत केवल छापेमारी की नहीं, बल्कि यह सामने आने की है कि जिन दुकानों पर ओवररेटिंग पकड़ी गई, वहां संबंधित जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई हुई, आबकारी निरीक्षण कब-कब हुआ और शिकायत मिलने के बाद विभाग ने क्या कदम उठाए।
आबकारी महकमे के लिए असली चुनौती अब छापा नहीं, अपनी निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब देना है।
