

धान खरीद के पहले दिन ही फेल हुआ तंत्र!
पांच ट्रालियां लेकर मंडी पहुंचे किसानों को नहीं मिली तौल, गुस्से में मुख्य गेट बंद कर धरने पर बैठे किसान!
खटीमा। सरकार ने एक अक्टूबर से धान खरीद शुरू करने का ऐलान किया, लेकिन खरीद के पहले ही दिन जमीनी व्यवस्था किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। धान से लदी पांच ट्रालियां लेकर मंडी समिति पहुंचे किसानों को जब न क्रय केंद्र खुला मिला और न तौल की स्पष्ट व्यवस्था, तो उनका आक्रोश फूट पड़ा। किसानों ने मंडी समिति का मुख्य गेट बंद कर धरना शुरू कर दिया।
मंडी में किसानों के पहुंचने के बावजूद धान खरीद शुरू नहीं होने और तौल को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने की सूचना पर भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष गुरूसेवक सिंह और मनजिंदर सिंह भुल्लर समेत अन्य किसान मंडी पहुंच गए। किसानों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मंडी गेट पर धरना शुरू कर दिया। इससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
सूचना मिलते ही एसडीएम तुषार सैनी मौके पर पहुंचे और किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की। बातचीत के बाद मंडी में पहुंची पांच ट्रालियों के धान को फिलहाल मंडी में रखने पर सहमति बनी। एसडीएम ने बताया कि सरकारी प्रोक्योरमेंट शुरू होते ही किसानों को निर्धारित समर्थन मूल्य के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
प्रशासन ने किसानों से अपील की कि दो अक्टूबर को गांधी जयंती और चार अक्टूबर को रविवार का अवकाश होने के कारण किसान पांच अक्टूबर से अपनी धान की ट्रालियां मंडी में लेकर आएं।
ऐलान पहले, व्यवस्था बाद में क्यों?
धान खरीद की तारीख पहले से घोषित होने के बावजूद पहले ही दिन किसानों का तौल के लिए भटकना व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंच गए, लेकिन क्रय केंद्र और तौल व्यवस्था को लेकर उन्हें मौके पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। नतीजा यह रहा कि खरीद शुरू होने के दिन ही किसान और प्रशासन आमने-सामने आ गए।
पांच ट्रालियों का मामला बातचीत से फिलहाल सुलझ गया, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब एक अक्टूबर से खरीद शुरू करने की घोषणा पहले से थी, तो मंडी में खरीद और तौल की पूरी व्यवस्था पहले दिन ही क्यों तैयार नहीं थी?
धान खरीद का सीजन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर पैदा हुआ यह गतिरोध आने वाले दिनों की व्यवस्थाओं के लिए भी चेतावनी माना जा सकता है।
धरने में मलूक सिंह, गुरविंदर सिंह भुल्लर, हरप्रीत सिंह, केवल सिंह, कुलदीप सिंह, जसवंत सिंह, बलजीत सिंह, जसविंदर सिंह बाजवा, जसप्रीत सिंह, सुरेंद्र सिंह राणा, बलविंदर सिंह, अमरजीत सिंह और लखविंदर सिंह समेत कई किसान मौजूद रहे।
