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धान खरीद के पहले ही दिन यूसीएफ की व्यवस्थाएं सवालों में, नानकमत्ता मंडी में किसानों का फूटा आक्रोश!

खटीमा के बाद नानकमत्ता में भी किसानों ने खोला मोर्चा, 3 अक्टूबर तक खरीद शुरू नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी!

दर्पण न्यूज 24/7 नानकमत्ता।

धान खरीद शुरू करने को लेकर उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) और शासन के दावों के बीच जमीनी तैयारियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खटीमा के बाद अब नानकमत्ता मंडी में भी किसानों का आक्रोश सामने आया है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को मंडी परिसर में विभिन्न किसान संगठनों की आम सभा हुई, जिसमें किसानों ने धान खरीद व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल उठाए।

किसान नेताओं का कहना है कि शासन की ओर से 1 अक्टूबर से धान खरीद शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन मंडियों में खरीद को लेकर अपेक्षित तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 3 अक्टूबर तक धान खरीद सुचारु रूप से शुरू नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि खरीद व्यवस्था में देरी का सीधा असर किसान पर पड़ेगा। खेतों में तैयार धान लेकर किसान मंडियों का रुख कर रहे हैं, लेकिन यदि सरकारी खरीद केंद्र समय पर सक्रिय नहीं हुए तो उन्हें निजी खरीदारों के भरोसे अपनी उपज बेचनी पड़ सकती है। किसानों का आरोप है कि ऐसी स्थिति में उन्हें कम कीमत पर धान बेचने का दबाव झेलना पड़ सकता है।

सरकारी दावे बनाम मंडी की हकीकत!

धान खरीद की तारीख घोषित होने के बावजूद यदि खरीद केंद्रों पर व्यवस्था पूरी तरह तैयार नहीं है तो सवाल सिर्फ खरीद शुरू होने का नहीं, बल्कि किसान को घोषित समर्थन मूल्य और समय पर भुगतान का भरोसा देने वाली पूरी व्यवस्था का है।

नानकमत्ता में हुई सभा ने इसी अंतर को सामने ला दिया है। किसान संगठनों ने सरकार से सवाल किया कि जब धान खरीद की तारीख पहले से तय थी, तो मंडियों में बारदाना, खरीद प्रक्रिया, तौल और भुगतान से जुड़ी व्यवस्थाएं समय रहते क्यों नहीं सुनिश्चित की गईं?

हालांकि इन व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभाग और यूसीएफ का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है, लेकिन किसानों के प्रदर्शन ने खरीद व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

किसानों ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन!

किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार के माध्यम से भेजा। इसमें जल्द धान खरीद शुरू कराने, राइस मिल मालिकों के बकाया भुगतान, बटाई और ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के दस्तावेजों के आधार पर उनकी फसल खरीदने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने की मांग की गई।

इसके अलावा गन्ने का गारंटेड मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने और गांवों में बढ़ रही नशा तस्करी पर रोक लगाने समेत अन्य मांगें भी उठाई गईं।

खटीमा के बाद नानकमत्ता में भी बढ़ी बेचैनी

धान खरीद को लेकर खटीमा के बाद नानकमत्ता में सामने आया किसानों का आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि खरीद व्यवस्था को लेकर मैदानी क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद व्यवस्था का उद्देश्य ही यह है कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिले। यदि खरीद केंद्र समय पर सक्रिय नहीं होते हैं तो पूरी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब नजर 3 अक्टूबर पर है। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तब तक धान खरीद शुरू नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यूसीएफ और संबंधित खरीद एजेंसियों की तैयारियों की असली परीक्षा मंडी में पहुंचने वाली धान की आवक के साथ होगी।

सभा में अखिल भारतीय किसान सभा (लोकतंत्र) के जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह, जिला संयोजक जागीर सिंह, भाकियू (टिकैत) के मलूक सिंह खिंडा, भाकियू (चढूनी) के अमरीक सिंह, अखिल भारतीय किसान महासभा के संयोजक ललित मटियाली समेत लोहर सिंह, त्रिलोक सिंह, अरूढ़ सिंह, दिनेश सिंह, मनखुशी राणा, बलबीर राणा, ध्यान सिंह, सुरसेवक सिंह, दलबीर सिंह और कुलदीप सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान नेता मौजूद रहे।

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