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जनसरोकार की पत्रकारिता से खिन्न हुआ ‘कथित पत्रकार’

भ्रामक टिप्पणी से उजागर हुई मानसिकता!

लालकुआं। क्षेत्र में रसोई गैस आपूर्ति व्यवस्था को लेकर जहां एक ओर उपभोक्ता समस्याओं से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनसरोकार से जुड़े जिम्मेदार पत्रकार पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली, गैस वितरण रोस्टर और व्यवस्थाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे लोगों को राहत मिल रही है और व्यवस्था सुधार के प्रयासों को मजबूती भी मिल रही है।
इसी बीच लालकुआं के एक कथित पत्रकार द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी ने उसकी मानसिकता को उजागर कर दिया है। उक्त व्यक्ति ने अपनी पोस्ट में लिखा—
“गैस बांटना गैस एजेंसियों का काम है, लेकिन कुछ तथाकथित पत्रकार ऐसे प्रचार कर रहे हैं जैसे ठेका उन्हीं का हो… आप क्यों कमीशन एजेंट बन रहे हो।”
इस प्रकार की टिप्पणी न केवल जनहित में कार्य कर रहे पत्रकारों पर अनावश्यक आरोप लगाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उक्त व्यक्ति को पारदर्शी और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता से आपत्ति है।
स्थानीय लोगों और जिम्मेदार मीडिया कर्मियों का कहना है कि जब पत्रकारिता का एक वर्ग पूरी ईमानदारी से प्रशासन और जनता के बीच सेतु बनकर काम कर रहा है, तब इस तरह की बयानबाजी केवल व्यक्तिगत कुंठा और स्वार्थ का परिचायक है। इससे न केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि व्यवस्था सुधार में लगे अधिकारियों, एजेंसी कर्मियों और मीडिया के प्रयासों का मनोबल भी प्रभावित होता है।
पूर्ति विभाग द्वारा गैस आपूर्ति को सुचारू करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, और इन प्रयासों की जानकारी जब निष्पक्ष रूप से जनता तक पहुंचती है, तो इससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़ते हैं। ऐसे में भ्रामक और आधारहीन टिप्पणियों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश करना अत्यंत निंदनीय है।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने इस कथित पत्रकार की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज को सही दिशा देना है, न कि व्यक्तिगत एजेंडा चलाकर भ्रम फैलाना। अब समय आ गया है कि ऐसे तत्वों की पहचान हो और जनहित में कार्य कर रही सकारात्मक पत्रकारिता को समर्थन मिले।