








‘बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं’ के दावों के बीच ये है जमीनी हकीकत?
हल्दूचौड़ सीएचसी में एक डॉक्टर के भरोसे 200 से ज्यादा मरीज, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल!
लोकार्पण के वर्षों बाद भी डॉक्टरों का टोटा, क्षेत्रवासियों में जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को लेकर बढ़ रही नाराजगी!
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। सरकार भले ही प्रदेश में सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतर चिकित्सा सेवाओं के दावे कर रही हो, लेकिन हल्दूचौड़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उन दावों की परतें उधेड़ता नजर आ रहा है। क्षेत्र की हजारों की आबादी के लिए स्थापित यह अस्पताल आज भी चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि बुधवार को दोपहर एक बजे तक अस्पताल में 150 से अधिक नए ओपीडी पंजीकरण हो चुके थे। पुराने मरीजों को मिलाकर उपचार के लिए पहुंचे लोगों की संख्या 200 से अधिक पहुंच गई।
इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के बीच ओपीडी का पूरा भार चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्णिका पंत पर दिखाई दिया। सवाल केवल एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य व्यवस्था का है, जहां एक विशेषज्ञ चिकित्सक को सामान्य मरीजों की लंबी कतार भी संभालनी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आवश्यकता पड़ने पर कोई भी पंजीकृत चिकित्सक सामान्य मरीजों का प्राथमिक उपचार कर सकता है, लेकिन जब एक चिकित्सक के सामने प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज हों तो हर मरीज को पर्याप्त समय, समुचित परीक्षण और गुणवत्तापूर्ण परामर्श देना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन हो जाता है। इसका खामियाजा आखिरकार मरीजों को ही भुगतना पड़ता है।
सुबह से अस्पताल परिसर में लगी लंबी कतारें, गोद में बच्चों को लिए माताएं, लाठी के सहारे खड़े बुजुर्ग और अपनी बारी का घंटों इंतजार करते मरीज व्यवस्था की बदहाली की गवाही देते रहे। कई मरीजों ने बताया कि घंटों इंतजार के बाद उन्हें कुछ ही मिनटों में परामर्श लेकर लौटना पड़ा।
सीएमओ बोलीं व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग लगातार व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डेंटल सर्जन डॉ. शालिनी कपूर, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्णिका पंत और डॉ. ममता सिंह को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ओपीडी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा प्रत्येक बुधवार को रेडियोलॉजिस्ट डॉ. कुमुद पंत अस्पताल में एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड की सेवाएं भी दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की नियुक्ति को लेकर शासन स्तर पर लगातार संवाद चल रहा है और विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति में सुधार होगा।
हालांकि बुधवार को डॉ. ममता सिंह की अनुपस्थिति के कारण मरीजों की परेशानी और बढ़ गई तथा पूरा दबाव सीमित चिकित्सकीय व्यवस्था पर आ गया।
लोकार्पण के बाद भी अधूरी रही स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर और सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी अस्पताल अपने मूल उद्देश्य को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद, सीमित संसाधन और अस्थायी व्यवस्थाएं अस्पताल की पहचान बनकर रह गई हैं।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से बढ़ रही नाराजगी।
अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, मंचों से विकास की लंबी-लंबी बातें होती हैं, लेकिन जब अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की बात आती है तो वर्षों से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को प्राथमिकता देकर शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी करते, तो शायद आज हल्दूचौड़ सीएचसी डॉक्टरों की कमी से नहीं जूझ रहा होता।
सबसे बड़ा सवाल…
जब एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीजों की जिम्मेदारी सीमित चिकित्सकीय व्यवस्था पर हो, तो क्या इसे बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था कहा जा सकता है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं केवल सरकारी रिपोर्टों और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं, या फिर धरातल पर भी इन्हें मजबूत करने की जरूरत है?
हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों—तीनों से जवाब मांग रहा है। अब देखना यह है कि वर्षों से चले आ रहे इस संकट का स्थायी समाधान कब निकलता है, या फिर हजारों लोगों की सेहत आगे भी अस्थायी व्यवस्थाओं के भरोसे ही चलती रहेगी।
