








50 साल पुराने सवाल का 27 सितंबर को लिखित जवाब मांगेगा बिंदुखत्ता
सीएम या समकक्ष प्रतिनिधि से वार्ता और लिखित आश्वासन की मांग को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, जवाब नहीं मिला तो क्रमिक अनशन की चेतावनी!
बिंदुखत्ता/हल्द्वानी। पांच दशक से राजस्व ग्राम के दर्जे की मांग कर रहे बिंदुखत्ता के ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। 27 दिन से जारी पदयात्रा के बीच आंदोलनकारियों ने 27 सितंबर को विशाल रैली और जनसभा का ऐलान किया है। इस बार ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकार को कोई नया ज्ञापन नहीं देंगे, बल्कि 50 साल पुराने सवाल का लिखित जवाब मांगेंगे।
शुक्रवार को तिवारी नगर स्थित वनदेवी मैया मंदिर से पदयात्रा शुरू हुई। महिला-पुरुषों की भागीदारी के बीच पदयात्रा हाट कालिका मंदिर पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। लोकगीतों और जनगीतों के जरिए ग्रामीणों ने बिंदुखत्ता की वर्षों पुरानी पीड़ा और राजस्व ग्राम की मांग को आवाज दी।
आंदोलनकारियों के अनुसार बिंदुखत्ता के ग्रामीण करीब 40 से 50 वर्षों से राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान कई सरकारें बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले और चुनावों के दौरान आश्वासन भी मिलते रहे, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मूल मांग आज भी पूरी नहीं हुई।
ग्रामीणों के लिए राजस्व ग्राम का मुद्दा केवल प्रशासनिक दर्जे का सवाल नहीं है। यह उनकी पहचान, पंचायती राज व्यवस्था और जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा मामला है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलता, तब तक यहां के लोगों की स्थानीय लोकतांत्रिक भागीदारी का सवाल अधूरा रहेगा।
सरकार चुनने का अधिकार है, ग्राम पंचायत चुनने का क्यों नहीं?
आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि बिंदुखत्ता के ग्रामीण लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदान कर सांसद और विधायक चुनते हैं। सरकार बनाने में अपनी भूमिका निभाते हैं, लेकिन अपनी ग्राम पंचायत चुनने के अधिकार से आज भी वंचित हैं।
उनका सवाल है कि जब लोकतंत्र में सरकार चुनने का अधिकार है तो अपनी ग्राम पंचायत चुनने का अधिकार क्यों नहीं?
इसी सवाल को लेकर पदयात्रा गांव-गांव आगे बढ़ रही है। आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बनी हुई है। लोकगीतों और जनगीतों के माध्यम से ग्रामीण अपने संघर्ष को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
डीएम को सौंपा ज्ञापन, अब नया ज्ञापन नहीं
पदयात्रा के बाद वन अधिकार संगठन और पूर्व सैनिक संगठन से जुड़े करीब 60 से 70 लोगों का प्रतिनिधिमंडल हल्द्वानी स्थित जिलाधिकारी कैंप कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली और जनसभा की अनुमति को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और कार्यक्रम की जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि 27 सितंबर की रैली में कोई नया ज्ञापन नहीं दिया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से ज्ञापन देने और आश्वासन लेने का सिलसिला चलता रहा है, लेकिन बिंदुखत्ता की मूल मांग का समाधान नहीं हो पाया।
अब ग्रामीण चाहते हैं कि मुख्यमंत्री स्वयं अथवा उनके समकक्ष कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि 27 सितंबर की रैली में पहुंचे। ग्रामीणों से वार्ता करे और बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने के मुद्दे पर लिखित आश्वासन दे।
सरकार का प्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो बढ़ेगा आंदोलन
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 27 सितंबर को सरकार की ओर से कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि वार्ता के लिए नहीं पहुंचता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जाएगा। इसके तहत क्रमिक अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
पदयात्रा का अगला पड़ाव 12 सितंबर की सुबह आठ बजे से शुरू होगा। वहीं 27 सितंबर की विशाल रैली और जनसभा को लेकर आंदोलनकारी गांव-गांव संपर्क और तैयारियों में जुटे हैं।
बिंदुखत्ता के इस आंदोलन में अब 27 सितंबर की तारीख खास बनती जा रही है। एक तरफ पांच दशक पुराना इंतजार है, दूसरी तरफ 27 दिनों से लगातार चल रही पदयात्रा और अब सरकार से लिखित जवाब की मांग।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार सवाल सिर्फ आश्वासन का नहीं, जवाबदेही का है। देखना होगा कि 27 सितंबर को सरकार बिंदुखत्ता के इस पांच दशक पुराने सवाल का कोई ठोस रास्ता निकालती है या आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश करता है।
