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पश्चिम एशिया संकट गहराया: ऊर्जा आपूर्ति, सुरक्षा और भारतीयों की सलामती पर केंद्र सरकार सतर्क!
नई दिल्ली, दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो ।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। संसद में बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह संकट अब लंबा खिंचता नजर आ रहा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने इसे देश के लिए आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय—तीनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी  द्वारा सदन को लगातार जानकारी दी जाती रही है, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए व्यापक दृष्टिकोण आवश्यक है।
तेल-गैस आपूर्ति पर असर, समुद्री मार्ग बने चुनौती।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। कच्चे तेल, एलपीजी और गैस का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। मौजूदा हालात में समुद्री मार्गों, विशेषकर रणनीतिक जलडमरूमध्यों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि संघर्ष प्रभावित देशों में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। सभी भारतीय दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया है और 24 घंटे कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाइन संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत कर भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन प्राप्त किया है।
इस दौरान कुछ भारतीयों की मौत और कुछ के लापता होने की घटनाओं पर उन्होंने गहरा दुख व्यक्त किया।
एलपीजी आपूर्ति पर दबाव, घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता
सरकार ने स्वीकार किया कि भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है। आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और देश में उत्पादन बढ़ाने के प्रयास तेज किए गए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीति कारगर
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदम मौजूदा संकट में सहायक साबित हो रहे हैं। भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है और अब 41 देशों से आयात किया जा रहा है। साथ ही, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और रिफाइनिंग क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
समुद्री मार्गों पर कड़ी निगरानी
सरकार ने खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर निगरानी बढ़ा दी है। तेल, गैस और उर्वरक जैसे आवश्यक संसाधनों से जुड़े जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक साझेदार देशों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
संसद से एकजुट संदेश की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में देश की संसद से एकजुटता का संदेश जाना जरूरी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि भारत हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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