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धामी सरकार के प्राकृतिक खेती मॉडल को नाबार्ड का सहारा, कोटाबाग बनेगी जैविक खेती की नई प्रयोगशाला!

₹43.57 लाख की परियोजना से 125 किसानों को मिला प्रशिक्षण, रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे कदम!

दर्पण न्यूज 24/7 | संवाददाता

हल्द्वानी। केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के साथ ही हाल ही में उत्तराखंड दौरे पर आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान के प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के आह्वान को साकार करते हुए अब  उत्तराखंड में भी प्राकृतिक खेती को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की मुहिम  जमीन पर असर दिखाने लगी है। नैनीताल जिले के कोटाबाग विकासखंड में नाबार्ड के सहयोग से शुरू की गई “जैविक खेती हेतु जैविक कीट नियंत्रण आधारित प्रौद्योगिकी संवर्धन परियोजना” किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। इस पहल का उद्देश्य खेती की लागत घटाना, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है।

करीब ₹43.57 लाख की इस परियोजना में नाबार्ड ने ₹30.90 लाख का अनुदान दिया है, जबकि ₹12.67 लाख की भागीदारी क्रियान्वयन संस्था की है। दो वर्ष की अवधि वाली यह परियोजना फिलहाल कोटाबाग विकासखंड के पांच गांवों में संचालित की जा रही है।

परियोजना का संचालन गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा कास्तकार विकास समिति, कोटाबाग के सहयोग से किया जा रहा है। इसके तहत अब तक 125 लघु एवं सीमांत किसानों को प्राकृतिक खेती और जैविक कीट नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

परियोजना के अंतर्गत किसानों के लिए 10 जागरूकता शिविर, 10 खेत प्रदर्शन, चार परिसर आधारित प्रशिक्षण और दो ग्राम स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। साथ ही जैव उर्वरक, जैविक एजेंट, फेरोमोन ट्रैप, चिपचिपे एवं प्रकाश प्रपंच, स्प्रे मशीन सहित अन्य आवश्यक कृषि सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।

इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि कोटाबाग में लघु जैविक कीट नियंत्रण उत्पादन इकाई की स्थापना है। यहां ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, ट्राइकोग्रामा, ब्यूवेरिया और मेटाराइज़ियम जैसे जैविक एजेंट स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे हैं। इससे किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण जैविक सामग्री मिलेगी और महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर खर्च कम होगा।

किसानों को वनस्पति आधारित जैविक घोल तैयार करने और प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ाने, जैव विविधता के संरक्षण और सुरक्षित कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राज्य सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्राकृतिक खेती और किसान कल्याण के विजन के अनुरूप यह परियोजना भविष्य में पूरे उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तर्ज पर प्राकृतिक खेती आधारित परियोजनाओं का विस्तार किया जाएगा।

बढ़ती उत्पादन लागत और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के बीच कोटाबाग का यह मॉडल उत्तराखंड में कृषि की नई दिशा तय कर सकता है। यदि किसानों को बाजार और जैविक उत्पादों का उचित मूल्य भी मिल गया तो प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार भी बन सकती है।

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