परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में ही फूटी कलह, फिर कैसे साकार होगा परिवर्तन का संकल्प?
पिथौरागढ़ सम्मेलन में मंच पर हंगामे के बाद कांग्रेस ने अपने ही नेता को थमाया कारण बताओ नोटिस, छह साल के निष्कासन की चेतावनी!
दर्पण न्यूज 24/7 देहरादून/पिथौरागढ़। उत्तराखंड कांग्रेस इन दिनों पूरे प्रदेश में “परिवर्तन संकल्प सम्मेलन” आयोजित कर सत्ता परिवर्तन का संदेश देने और संगठन को एकजुट दिखाने में जुटी है। लेकिन जिस अभियान का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर परिवर्तन का संकल्प दिलाना है, उसी मंच से सामने आई आपसी कलह ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में ही संगठन बिखरा नजर आए, तो परिवर्तन का संकल्प आखिर कैसे साकार होगा?
पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित सम्मेलन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में कथित तौर पर मंच पर हंगामा, अव्यवस्था और वरिष्ठ नेताओं के साथ अभद्र व्यवहार की घटना सामने आई। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला कांग्रेस के नेता दीपक लुंठी को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया है।
प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र सिंह भण्डारी की ओर से जारी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि दीपक लुंठी ने अपने समर्थकों के साथ मंच की गरिमा भंग की और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया जा सकता है।
दिलचस्प यह है कि नोटिस की प्रतिलिपि कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, सह-प्रभारियों और अनुशासन समिति तक भेजी गई है, जिससे साफ है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की गुटबाज़ी बनती दिख रही है। परिवर्तन संकल्प सम्मेलन यदि आपसी शक्ति प्रदर्शन और विवाद का मंच बनेंगे, तो जनता के बीच एकजुटता और विकल्प होने का संदेश देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।
पिथौरागढ़ की घटना ने कांग्रेस के अभियान पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि पार्टी इस विवाद को जल्द सुलझाकर संगठन को संभाल पाती है या फिर यह कलह आने वाले दिनों में और गहराती है।
