खबरें शेयर करें -

देवभूमि को कलंकित करती घिनौनी करतूत, किराये के मकान में कथित देह व्यापार का खुलासा!

हरभजवाला में पुलिस की दबिश से खुला कथित रैकेट, छह गिरफ्तार, नाबालिग के रेस्क्यू से मामला बना और गंभीर!

दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो | देहरादून

देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में किराये के मकान की आड़ में कथित देह व्यापार और नाबालिग को इसमें धकेलने का मामला सामने आने से सनसनी फैल गई। पटेलनगर थाना क्षेत्र के हरभजवाला स्थित नीलकंठ एन्क्लेव में पुलिस ने छापा मारकर तीन महिलाओं और तीन पुरुषों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में कथित रैकेट का सरगना भी शामिल है। कार्रवाई के दौरान एक नाबालिग को भी रेस्क्यू कर संरक्षण में लिया गया।

पुलिस के अनुसार, एक अक्टूबर को मुखबिर से किराये के मकान में कथित देह व्यापार संचालित होने की सूचना मिली थी। सूचना पर पुलिस टीम ने मकान में दबिश दी। मौके से छह लोगों को पकड़ा गया। तलाशी में 18 हजार रुपये नकद, आपत्तिजनक सामग्री और दवाइयां बरामद होने का पुलिस ने दावा किया है।

तस्वीरें व्हाट्सऐप पर, ग्राहक की पसंद पर होती थी ‘डिलीवरी’!

पुलिस पूछताछ में कथित नेटवर्क के संचालन का तरीका भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक, रैकेट से जुड़े लोग दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से महिलाओं को ग्राहकों की मांग के अनुसार देहरादून बुलाते थे। ग्राहकों से व्हाट्सऐप पर संपर्क किया जाता और महिलाओं की तस्वीरें भेजी जाती थीं।

पसंद तय होने के बाद महिलाओं को कथित तौर पर किराये के कमरे अथवा ग्राहक के बताए स्थान पर भेजा जाता था। यानी किराये का मकान कथित तौर पर केवल ठिकाना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के संचालन का एक हिस्सा बना हुआ था।

मसूरी घुमाने के बहाने नाबालिग को देहरादून लाने का आरोप!

मामले ने उस वक्त गंभीर रूप ले लिया जब पुलिस को मौके से एक नाबालिग मिली। पुलिस के अनुसार, आरोपी का साथी उसे दिल्ली से मसूरी घुमाने के बहाने देहरादून लेकर आया था। आरोप है कि यहां नाबालिग पर देह व्यापार के लिए दबाव बनाया गया और विरोध करने पर उसे कमरे में रोककर रखा गया।

पुलिस ने नाबालिग को मुक्त कराकर संरक्षण में ले लिया है। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि इस कथित नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं और नाबालिग तक इसकी पहुंच कैसे हुई।

छह गिरफ्तारियां, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं!

पटेलनगर कोतवाली में पॉक्सो एक्ट, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस कथित रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई सवाल भी सामने हैं—किराये के मकान में कथित गतिविधि कब से चल रही थी? मकान किस सत्यापन प्रक्रिया के तहत किराये पर लिया गया था? क्या नेटवर्क में और लोग शामिल हैं? क्या देहरादून के अलावा दूसरे शहरों तक भी इसकी कड़ियां जुड़ी हैं?

इन सवालों के जवाब पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।

देवभूमि में नाबालिग तक पहुंचा कथित नेटवर्क, अब असली कसौटी जांच की!

देहरादून को शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति की पहचान देने वाली राजधानी में यदि किराये के मकान की आड़ में ऐसा कथित नेटवर्क संचालित हो रहा था और उसकी गिरफ्त में नाबालिग तक पहुंच गई, तो मामला महज छह गिरफ्तारियों का नहीं है। यह उस पूरे तंत्र की पड़ताल का विषय है, जिसकी निगरानी और सत्यापन व्यवस्था के बीच ऐसा कथित खेल चलने का आरोप है।

पुलिस ने कार्रवाई जरूर की है, लेकिन अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच सिर्फ छह आरोपियों तक सीमित रहती है या कथित नेटवर्क के संचालकों, संपर्क सूत्रों और अन्य कड़ियों तक पहुंचती है।

देवभूमि की छवि पर सवाल खड़े करने वाले इस मामले में सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि जांच निष्पक्ष और पूरी हो तथा नाबालिग सहित पीड़ितों की सुरक्षा और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।

 

उत्तराखंड