








बुरा न मानो होली है…
चुनावी मौसम में नेताओं का गृहप्रवेश उत्सव शुरू!
दर्पण न्यूज 24/7 विशेष होली व्यंग्य रिपोर्ट!
लालकुआं! होली आते ही रंग, गुलाल और ठिठोली का मौसम शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार रंगों से पहले राजनीति में गृहप्रवेश का गुलाल उड़ता नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव 2027 की दस्तक क्या हुई, प्रदेश में नेताओं के नए-नए आशियानों में पूजा, हवन और भव्य गृहप्रवेश कार्यक्रमों की बहार आ गई है।
कहीं नारियल फूट रहा है, कहीं फीता कट रहा है, तो कहीं समर्थक ऐसे मिठाई बांट रहे हैं जैसे जीत का प्रमाणपत्र पहले ही मिल गया हो।
जनता भी पूरे होली मूड में है… बधाई दे रही है, फोटो खिंचवा रही है और मुस्कुराकर कह रही है —
“नेता जी, बुरा न मानो होली है… पर बहुत कठिन है डगर पनघट की!”
राजनीतिक याददाश्त रखने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा नई नहीं है। पिछले चुनावों से पहले भी कई नेताओं ने शानदार गृहप्रवेश किए थे। उस समय लगा था कि अब सत्ता भी स्थायी रूप से इसी पते पर शिफ्ट हो जाएगी।
लेकिन चुनावी रंग उतरते ही कई हवेलियों का हाल ऐसा हुआ कि आज वहां न ढोल बजता है, न कार्यकर्ताओं की भीड़ लगती है।
कभी जहां रोज “रणनीति बैठक” होती थी, अब वहां सिर्फ मकड़ी के जाले चुनावी विश्लेषण करते नजर आते हैं।
होली के रंग में जनता का व्यंग्य भी खूब घुला हुआ है —
“घर का वास्तु तो ठीक है नेता जी, बस जनता का मूड भी मिल जाना चाहिए।”
राजनीति के जानकार कहते हैं,
होली में रंग टिके या न टिके, लेकिन चुनावी रंग कब उतर जाए — कोई गारंटी नहीं।
फिलहाल गृहप्रवेश जारी हैं, आशीर्वाद जारी है, फोटो सेशन जारी है…
और जनता ठहाका लगाकर बस इतना कह रही है —
“घर नया मुबारक हो नेता जी… बुरा न मानो होली है!”
अब 2027 के बाद पता चलेगा कि ये हवेलियां सत्ता के रंग में रंगी रहेंगी या फिर अगली होली तक सिर्फ यादों में गुलाल उड़ाती नजर आएंगी।
