राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथियों का आतंक: वन विभाग की उदासीनता से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा।
दर्पण न्यूज 24/7 के लिए प्रमोद बमेटा की रिपोर्ट
हल्दूचौड़।
शनिवार की तड़के लगभग पौने छह बजे बच्ची धर्मा क्षेत्र से निकलकर हाथियों का एक झुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पार करता हुआ पश्चिम दिशा में जंगल की ओर बढ़ गया। मदमस्त चाल में विचरण कर रहे हाथियों को अचानक हाईवे पर देखकर राहगीरों में दहशत फैल गई। कुछ देर के लिए यातायात थम सा गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई दुर्घटना नहीं घटी, लेकिन हालात ऐसे थे कि जरा सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती थी।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथियों की लगातार आवाजाही अब केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। इसके बावजूद वन विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
ग्रामीणों में भय, नुकसान लगातार बढ़ रहा
क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का आबादी की ओर आना कोई नई समस्या नहीं है। आए दिन हाथी फसलों को रौंद रहे हैं, घरों के आसपास घूम रहे हैं और राजमार्ग पार करते समय वाहनों के सामने आकर जान का खतरा पैदा कर रहे हैं।
ग्रामीण कई बार वन विभाग और प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि किसी भी समय जनहानि हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी बाद में तय करना मुश्किल होगा।
आखिर आबादी की ओर क्यों बढ़ रहे हैं हाथी?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई गंभीर कारण हैं—
जंगलों में भोजन और जल स्रोतों की कमी: प्राकृतिक घास, फलदार वृक्ष और पानी के स्रोत लगातार घट रहे हैं, जिससे हाथी मानव बस्तियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
वन क्षेत्र का सिकुड़ना और अतिक्रमण: सड़क, रेलवे लाइन और विकास परियोजनाओं ने पारंपरिक हाथी गलियारों को बाधित कर दिया है।
हाथियों की संख्या बढ़ना, जंगल सीमित होना: सुरक्षित आवास नहीं बढ़ने से टकराव की स्थिति बन रही है।
वन विभाग की नाकामी पर उठे सवाल
क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वन विभाग अब तक प्रभावी रोकथाम क्यों नहीं कर पाया—
हाथियों की मूवमेंट पर नजर रखने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली का अभाव
हाथी गलियारों की अनदेखी और अतिक्रमण पर ढिलाई
संवेदनशील इलाकों में सोलर फेंसिंग, ट्रेंच और अवरोधों की कमी
ग्रामीणों को निगरानी तंत्र से जोड़ने में स्थानीय सहभागिता का अभाव
राजमार्ग बना मौत का रास्ता
राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच हाथियों का अचानक आ जाना जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषकर रात और तड़के के समय दृश्यता कम होने से दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब जरूरी है ठोस कार्रवाई
हाथी गलियारों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित किया जाए
राष्ट्रीय राजमार्ग पर संवेदनशील स्थानों पर स्पीड लिमिट और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं
जंगलों में भोजन और जल स्रोत विकसित किए जाएं
वन विभाग, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच त्वरित अलर्ट सिस्टम बनाया जाए
कुल मिलाकर, हाथियों का आबादी और राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर बढ़ता रुख एक गंभीर चेतावनी है। यह केवल वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा से सीधा जुड़ा सवाल है।
यदि अब भी वन विभाग और प्रशासन नहीं चेते, तो किसी बड़ी अनहोनी की पूरी आशंका बनी रहेगी।
