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मामला उजागर होते ही अस्थाई बिजली कनेक्शन की कवायद, छात्रावास निर्माण पर उठे नए सवाल!

मीडिया में सवाल उठते ही जागे जिम्मेदार! छात्रावास निर्माण में अब लिया जा रहा है अस्थाई बिजली कनेक्शन!

दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे छात्रावास भवन के निर्माण कार्य को लेकर उठे बिजली उपयोग संबंधी सवाल अब और गहराते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि जब निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है और मीडिया के माध्यम से बिजली उपयोग को लेकर सवाल सार्वजनिक हुए हैं, तभी संबंधित ठेकेदार द्वारा अस्थाई विद्युत संयोजन के लिए आवेदन किया गया है। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।

अब तक कार्यदायी संस्था और ठेकेदार की ओर से यह कहा जाता रहा कि निर्माण कार्य मुख्य रूप से निजी जनरेटरों के माध्यम से कराया गया। लेकिन यदि ऐसा था, तो फिर निर्माण के अंतिम दौर में अचानक अस्थाई बिजली कनेक्शन लेने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? यही सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूत्रों की मानें तो निर्माण स्थल पर बिजली उपयोग को लेकर पहले से ही कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि किसी भी स्तर पर बिजली चोरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित विभाग ने ऐसा कोई दावा किया है। लेकिन मीडिया में मामला सामने आने के बाद अस्थाई संयोजन के लिए आवेदन किया जाना कई लोगों के मन में नए सवाल जरूर खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे निर्माण कार्य में जनरेटरों का ही उपयोग किया गया है तो उसके संचालन, ईंधन खपत और भुगतान से संबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे। वहीं यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण अवधि के दौरान ऊर्जा आपूर्ति की निगरानी किस स्तर पर हुई और क्या संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया।

इस संबंध में यूपीसीएल के अवर अभियंता ने बताया कि छात्रावास भवन के लिए अस्थाई विद्युत संयोजन हेतु अब आवेदन प्राप्त हुआ है तथा नियमानुसार जल्द ही अस्थाई कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा।

वहीं पूरे मामले में कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर और संबंधित ठेकेदार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फोन किए जाने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

फिलहाल छात्रावास भवन लगभग तैयार है, लेकिन उसके निर्माण में इस्तेमाल हुई ऊर्जा का वास्तविक स्रोत क्या था, यह सवाल अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। ऐसे में लोगों की निगाहें कार्यदायी संस्था, ऊर्जा निगम और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि मामला महज एक संयोग है या फिर इसके पीछे कोई ऐसा तथ्य छिपा है, जो अब तक सामने नहीं आ पाया।

 

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