








टांडा के जंगल में हाथियों का तांडव, बिजली टावर ध्वस्त।
लालकुआं, बिंदुखत्ता समेत बरेली रोड के कई गांव घंटों अंधेरे में डूबे, जान जोखिम में डालकर पहुंचे विद्युत कर्मी।
लालकुआं क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक अब भयावह रूप लेता जा रहा है। बीती रात टांडा जंगल में हाथियों के झुंड ने ऐसा उत्पात मचाया कि किच्छा से लालकुआं को आने वाली 33 केवी विद्युत लाइन का विशालकाय टावर ही धराशायी होने की कगार पर पहुंच गया। हाथियों ने सूंड और पैरों से टावर को बुरी तरह टेढ़ा कर दिया, जिससे हाईटेंशन लाइन पेड़ों से टकरा गई और पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
घटना के बाद लालकुआं, बिंदुखत्ता, बरेली रोड और आसपास के कई गांवों में घंटों तक ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी रही। रातभर लोग गर्मी और अंधेरे से परेशान रहे, जबकि विद्युत विभाग के कर्मचारियों को भी जान हथेली पर रखकर जंगल में उतरना पड़ा। बताया जा रहा है कि जब विद्युत कर्मी लाइन की जांच के लिए टांडा जंगल पहुंचे तो वहां हाथियों का झुंड मौजूद था, जिसे देखकर कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। बाद में अधिकारियों को सूचना देकर सुरक्षा के बीच मरम्मत कार्य शुरू कराया गया।
विद्युत विभाग के एसडीओ संजय प्रसाद के नेतृत्व में कर्मचारियों ने पूरे दिन मशक्कत कर क्षतिग्रस्त टावर के स्थान पर वैकल्पिक विद्युत पोल खड़े किए। कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी।
इस घटना ने एक बार फिर तराई क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने ला दी है। जंगल से आबादी की ओर बढ़ रहे हाथियों के झुंड अब केवल फसलों या ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि सरकारी ढांचे और जनसुविधाओं के लिए भी बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टांडा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम ने बताया कि इस समय हाथियों का मिलन काल चल रहा है, जिसके चलते वे अत्यधिक आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से फिलहाल जंगल की ओर जाने से बचने की अपील की है।
लगातार बढ़ रही घटनाओं के बावजूद वन विभाग और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर कब तक ग्रामीण और कर्मचारी हाथियों के खौफ में जीते रहेंगे? यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी विकराल रूप ले सकता है।
