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आजादी के 89 साल बाद भी सड़क से दूर गांव, पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की मांग तेज!

इडियाकोट मल्ला में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की बदहाली पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी!

देहरादून। जनपद पौड़ी गढ़वाल की तहसील रिखणीखाल के अंतर्गत पट्टी इडियाकोट मल्ला क्षेत्र को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर इडियाकोट मल्ला भ्रातृ मंडल समिति संस्कृति एवं सरोकार मंच पौड़ी गढ़वाल के संस्थापक भक्तदर्शन सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री समेत पूर्व मुख्यमंत्रियों, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण और लैंसडौन विधायक दिलीप रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजा है।

ज्ञापन में क्षेत्र की बदहाल तस्वीर सामने रखते हुए कहा गया है कि आजादी के दशकों बाद भी इडियाकोट मल्ला के कई गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। मज्याड़ी, मज्याडीसैंण, बिन्दवाल और चिमना समेत कई गांवों के ग्रामीणों को आज भी आवागमन के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी चिंता का विषय बताई गई है। सिद्धाखाल क्षेत्र में एलोपैथिक अस्पताल नहीं होने के कारण लोगों को उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है। वहीं टकोलीखाल जैसे दुर्गम क्षेत्र में, जो ब्लॉक मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बताया गया है, बैंकिंग सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।

न शिक्षा की पर्याप्त सुविधा, न रोजगार के अवसर

ज्ञापन में क्षेत्र में आईटीआई, पॉलीटेक्निक और उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी का भी उल्लेख किया गया है। स्थानीय स्तर पर अच्छी बाजार व्यवस्था और कोचिंग संस्थानों के अभाव के कारण युवाओं को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दूसरे शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।

रोजगार के अवसरों की कमी, स्थानीय उद्योगों का अभाव और खेती की बदहाली को भी पलायन की प्रमुख वजह बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के बढ़ते खतरे के कारण खेती करना भी चुनौती बन गया है, जिससे खेत बंजर होते जा रहे हैं।

ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि राज्य गठन के बाद से क्षेत्र के किसी बच्चे का राज्य समूह ‘ग’ की परीक्षा में चयन नहीं हुआ है। हालांकि इस दावे के समर्थन में आंकड़े या आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

‘विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए मिले पिछड़ा क्षेत्र का दर्जा’ !

भक्तदर्शन सिंह नेगी का कहना है कि इडियाकोट मल्ला क्षेत्र लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से दूर रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, रोजगार और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते क्षेत्र से लगातार पलायन हो रहा है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र का सर्वे कराकर उसे पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि विशेष योजनाओं और विकास कार्यों के माध्यम से यहां के ग्रामीणों और युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।

नेगी ने कहा कि क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि उसे जल्द ओबीसी का दर्जा भी मिलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र की समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो भविष्य में ग्रामीणों को बड़े जनआंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

सवाल अब यह है कि दशकों से विकास की बाट जोह रहे इडियाकोट मल्ला क्षेत्र की समस्याओं पर शासन-प्रशासन कब गंभीरता दिखाता है और क्या पिछड़ेपन के वास्तविक कारणों का आकलन कर क्षेत्र के लिए विशेष विकास पैकेज अथवा अन्य प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।

उत्तराखंड