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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड में जनहित याचिका के बाद उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टर का शाशन स्तर से तबादले को लेकर पनपा जनाक्रोश,जनआंदोलन की चेतावनी।
रिंकू पाठक और पीयूष जोशी ने सीएमओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, बोले  पहले विकल्प, फिर स्थानांतरण होना चाहिए था।
दर्पण न्यूज 24×7 | हल्दूचौड़
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हल्दूचौड़ से विशेषज्ञ चिकित्सक के स्थानांतरण को लेकर अब मामला गंभीर होता जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि जिस विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में की गई थी, उनका बिना किसी वैकल्पिक विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती के स्थानांतरण कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर ‘मेरा सपना मेरी कोशिश’ सांस्कृतिक एवं सामाजिक समिति के अध्यक्ष रिंकू पाठक और समाजसेवी पीयूष जोशी ने मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) नैनीताल से मुलाकात कर उनके माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा। उन्होंने मांग की कि स्थानांतरण आदेश पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए अथवा बिना विलंब समकक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति की जाए।
समिति का कहना है कि हल्दूचौड़ सीएचसी पर 16 से अधिक ग्राम सभाओं और हजारों लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं निर्भर हैं। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक का हटना सीधे तौर पर आम जनता के इलाज को प्रभावित करेगा। उनका आरोप है कि पहले से ही अस्पताल में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, जांच सुविधाओं और संसाधनों की कमी है, ऐसे में यह फैसला जनहित के विपरीत प्रतीत होता है।
इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल ने भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने स्वीकार किया कि हल्दूचौड़ सीएचसी में संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति जनहित याचिका के आधार पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में की गई थी। सीएमओ ने बताया कि इस मामले को लेकर शासन से पत्राचार किया जा रहा है और उच्च स्तर पर आवश्यक निर्णय की अपेक्षा की जा रही है।
समिति ने अस्पताल में रिक्त पदों को भरने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, दवाइयों एवं जांच सुविधाओं की नियमित उपलब्धता, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेवाओं के सुचारु संचालन, आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने तथा अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं में सुधार की भी मांग उठाई है।
रिंकू पाठक और पीयूष जोशी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो क्षेत्रवासियों के साथ व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है  जब अदालत के निर्देशों के क्रम में विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति हुई थी, तो बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उनका स्थानांतरण किस आधार पर कर दिया गया? इस प्रश्न का उत्तर स्वास्थ्य विभाग और शासन, दोनों को देना होगा।

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