आयुष्मान भारत में फर्जीवाड़ा: प्राइमस अस्पताल का अनुबंध निलंबित, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की कड़ी कार्रवाई।
देहरादून से हमारे विशेष संवाददाता धर्मेंद्र शर्मा की रिपोर्ट।
देहरादून। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत मरीजों के इलाज के नाम पर फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। देहरादून स्थित प्राइमस अस्पताल द्वारा योजना के अंतर्गत गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर भुगतान प्राप्त किए जाने की पुष्टि होने के बाद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसका अनुबंध तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्राधिकरण द्वारा ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) पोर्टल पर अस्पताल की ओर से लगाए गए क्लेम्स का ऑडिट कराया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि अस्पताल द्वारा कई मामलों में फर्जी दस्तावेज, अपूर्ण रिकॉर्ड और नियमों के विपरीत क्लेम प्रस्तुत किए गए। कुछ मामलों में मरीजों के इलाज से संबंधित आवश्यक मेडिकल प्रमाण भी नहीं पाए गए।
ऑडिट में यह भी उजागर हुआ कि कुछ लाभार्थियों के नाम पर ऐसे उपचार दर्शाए गए जो वास्तविक रूप से किए ही नहीं गए, जबकि कई केसों में निर्धारित पैकेज गाइडलाइन का उल्लंघन किया गया। यह सभी कृत्य आयुष्मान भारत योजना की शर्तों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अस्पताल द्वारा दिए गए जवाब को असंतोषजनक मानते हुए प्राधिकरण ने अनुबंध निलंबन का निर्णय लिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच पूरी होने तक अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किसी भी मरीज का इलाज नहीं कर सकेगा।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यदि आगे भी अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो अस्पताल पर आर्थिक दंड, रिकवरी और स्थायी ब्लैकलिस्टिंग जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संस्तुति भी की जाएगी।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत योजना गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के लिए है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी सभी सूचीबद्ध अस्पतालों के क्लेम्स की नियमित जांच और ऑडिट जारी रहेगा।
