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हल्द्वानी में रिवर्स पलायन से ग्राम विकास सम्मेलन
गाँव लौटे युवा बने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए ‘ग्रोथ इंजन’
दर्पण न्यूज 24/7 हल्द्वानी (नैनीताल)।
उत्तराखण्ड के गाँवों में स्वरोजगार की नई क्रांति को गति देने और शहरों से लौटकर अपनी माटी में भविष्य गढ़ रहे युवाओं के प्रयासों को दिशा देने के उद्देश्य से शनिवार को ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग द्वारा प्रसार प्रशिक्षण केन्द्र (ईटीसी), हल्द्वानी में “रिवर्स पलायन से ग्राम विकास सम्मेलन” का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का केंद्र वे रिवर्स प्रवासी युवा रहे, जिन्होंने महानगरों की चकाचौंध छोड़कर अपने गाँवों में रहकर खेती, उद्यम और नवाचार के जरिए आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है।
गाँव लौटे युवा ग्रामीण विकास की धुरी: डॉ. एस.एस. नेगी
आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि गाँव लौटे युवा आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए ग्रोथ इंजन बन चुके हैं। आयोग इन युवाओं को आधुनिक मशीनें, उन्नत तकनीक और उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रिवर्स पलायन आत्मसम्मान की वापसी: राम प्रकाश पैन्यूली
माननीय सदस्य श्री राम प्रकाश पैन्यूली ने कहा कि रिवर्स पलायन केवल घर वापसी नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के आत्मसम्मान की वापसी है। सीमित संसाधनों में भी गाँव लौटे प्रवासी जो नवाचार कर रहे हैं, वह प्रेरणादायक है। आयोग का प्रयास है कि प्रवासियों की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाकर ऐसा माहौल बनाया जाए, जहाँ गाँव में ही सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध हो सके।
नीतियाँ अब अनुभवों से बनेंगी: भरत भट्ट
आयोग के सदस्य सचिव श्री भरत भट्ट ने स्पष्ट किया कि आगामी सरकारी योजनाएँ अब धरातल पर काम कर रहे प्रवासियों के अनुभव और सुझावों के आधार पर तैयार की जाएँगी। वास्तविक चुनौतियों को समझकर ही प्रभावी रणनीति बनाई जाएगी।
हुनर से ही टिकाऊ प्रगति संभव: प्राचार्य पूनम कांडपाल
प्रसार प्रशिक्षण केन्द्र की प्राचार्य श्रीमती पूनम कांडपाल ने कहा कि हुनर ही प्रगति की कुंजी है। केंद्र द्वारा प्रवासियों को खेती के साथ-साथ व्यावसायिक प्रबंधन और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि उनके उद्यम आर्थिक रूप से सफल हो सकें।
प्रशासनिक सहयोग का भरोसा
जिला विकास अधिकारी नैनीताल ने प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने का भरोसा दिलाया, जबकि शोध अधिकारी गजपाल चन्दानी ने बताया कि सफल रिवर्स प्रवासियों की कहानियों का दस्तावेज़ीकरण किया जा रहा है, ताकि उन्हें पूरे प्रदेश में मॉडल के रूप में लागू किया जा सके।
मशरूम, शहद, होमस्टे और जैविक खेती बने चर्चा का केंद्र
सम्मेलन में रिवर्स प्रवासियों ने मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन, होमस्टे और जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में अपनी सफलताएँ साझा कीं। मंथन के बाद प्रमुख रूप से इन बिंदुओं पर सहमति बनी—
सफल मॉडलों का विस्तार: एक प्रवासी के सफल प्रयोग को पूरे क्षेत्र में लागू करना।
बाजार और ब्रांडिंग: पहाड़ी उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग के साथ डिजिटल बाजार से जोड़ना।
निरंतर संवाद: जिला और ग्राम स्तर पर नियमित अनुभव-साझा मंच विकसित करना।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य श्री सुरेश सुयाल, श्री अनिल साही सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में रिवर्स प्रवासी उपस्थित रहे।

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