








टिकट की दौड़ में बढ़ती कतार, खड़गे के खड़्ग पर टिकी निगाहें!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं।
लालकुआं विधानसभा सीट पर कांग्रेस के भीतर टिकट की जंग अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। दावेदारों की लंबी कतार ने मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है। हेमवती नंदन दुर्गापाल और हरेंद्र बोरा जहां सबसे मजबूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने हैं, वहीं शंकर जोशी, प्रमोद कालोनी, बालम सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह खनवाल, बीना जोशी और उमेश कबड़वाल समेत कई अन्य नेता भी अपनी राजनीतिक पकड़ और जनाधार को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
टिकट की इस होड़ ने साफ कर दिया है कि लालकुआं को लेकर कांग्रेस के भीतर मुकाबला सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि प्रभाव और संगठनात्मक ताकत का भी है। हर दावेदार अपने-अपने जनसंपर्क, जातीय-सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय पकड़ के दम पर खुद को सबसे मजबूत विकल्प साबित करने में जुटा है।
ऐसे में कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल “जीतने वाला चेहरा” चुनना नहीं, बल्कि ऐसा उम्मीदवार तय करना है जो पूरे संगठन को एकजुट कर भाजपा के खिलाफ एक सशक्त मोर्चा खड़ा कर सके।
मौजूदा राजनीतिक हालात और संभावित एंटी-इन्कम्बेंसी के बीच लालकुआं कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। लेकिन इस अवसर को जीत में बदलने के लिए सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि रणनीति, समन्वय और संगठन की लोहे जैसी एकजुटता भी जरूरी होगी।
अब सबकी निगाहें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं।
कौन बनेगा लालकुआं का सेनानायक? किसके कंधों पर सौंपी जाएगी भाजपा के गढ़ को भेदने की जिम्मेदारी?
दावेदार कई हैं, लेकिन टिकट एक ही है, और फैसला भी एक ही होना है।
अब देखना यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का ‘खड़्ग’ किस पर चलता है,और लालकुआं की इस सियासी जंग में अंतिम मुहर किसके नाम पर लगती है।
खड़गे ने उत्तराखंड दौरा कर खड़्ग तो धारदार कर दिया है, लेकिन अब यह धार किस सेनानायक के हाथों में दी जाएगी, यही सबसे बड़ा और दिलचस्प सस्पेंस बना हुआ है।
