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आईजी निवेदिता कुकरेती की कुशल कार्यशैली ने कुमाऊं पुलिसिंग को दी नई धार!
अपराध के बाद कार्रवाई से आगे बढ़कर अपराध की रोकथाम पर जोर, ‘देवभूमि का सुरक्षा कवच’ अभियान में दिखी सक्रिय और संवेदनशील पुलिसिंग!
प्रमोद बमेटा | दर्पण न्यूज 24×7
हल्द्वानी। पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ अपराध होने के बाद अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकना और आमजन को जागरूक करना भी प्रभावी पुलिसिंग का अहम हिस्सा है। कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती की कार्यशैली में यह सोच अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगी है। आधुनिक तकनीक, जनसंवाद और त्वरित कार्रवाई को प्राथमिकता देते हुए आईजी ने पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
इसी सोच का परिणाम है ‘देवभूमि का सुरक्षा कवच’ अभियान, जिसके माध्यम से साइबर अपराध, महिला एवं बाल सुरक्षा, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और नशे के खिलाफ आमजन को जागरूक कर पुलिस के साथ जोड़ा जा रहा है।
हल्द्वानी कोतवाली सभागार में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में आईजी निवेदिता कुकरेती ने जिस सहजता से आमजन और पुलिस के बीच संवाद स्थापित किया, उससे उनकी कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते दौर में अपराध के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं और पुलिस को भी अपनी रणनीति लगातार अपडेट करनी होगी।
साइबर अपराध को लेकर आईजी ने विशेष रूप से लोगों को सतर्क किया। डिजिटल अरेस्ट, एआई आधारित साइबर अपराध, फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और म्यूल अकाउंट जैसे नए तरीकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने लोगों से किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी नहीं देने की अपील की। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से शिकायत करने की जानकारी देकर उन्होंने यह संदेश दिया कि साइबर अपराध में समय पर उठाया गया कदम पीड़ित की रकम बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
महिला और बाल सुरक्षा को लेकर भी आईजी की संवेदनशील कार्यशैली सामने आई। उन्होंने जीरो एफआईआर, एसओएस एवं लाइव लोकेशन सुविधा, सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181 और महिला चीता पुलिस जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। बच्चों की सुरक्षा के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, मिशन वात्सल्य और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की भूमिका को भी जनसंवाद में प्रमुखता से रखा गया। इससे स्पष्ट है कि पुलिसिंग में अपराध नियंत्रण के साथ संवेदनशीलता को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर भी आईजी ने केवल यातायात नियमों के पालन की अपील नहीं की, बल्कि गोल्डन ऑवर, राह-वीर योजना, एएनपीआर कैमरे, ई-चालान व्यवस्था और दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट में किए जा रहे सुधार कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने की अपील करते हुए सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद के लिए आगे आने का संदेश दिया।
आईजी निवेदिता कुकरेती की कार्यशैली में तकनीक और जनभागीदारी का संतुलन भी दिखाई देता है। एक ओर पुलिस आधुनिक तकनीक और साइबर संसाधनों का इस्तेमाल कर अपराधियों पर शिकंजा कसने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर जनसंवाद के माध्यम से नागरिकों को सुरक्षा व्यवस्था का सक्रिय भागीदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘देवभूमि का सुरक्षा कवच’ अभियान इसी सोच को धरातल पर उतारने की कोशिश है। यदि आमजन साइबर ठगी के प्रति सतर्क हों, महिला और बाल अपराध की सूचना समय रहते पुलिस तक पहुंचे, सड़क हादसों में लोग घायलों की मदद के लिए आगे आएं और नशे के खिलाफ समाज पुलिस का सहयोग करे, तो अपराध नियंत्रण की तस्वीर में बड़ा बदलाव संभव है।
कुल मिलाकर आईजी निवेदिता कुकरेती की कार्यशैली में सख्ती के साथ संवेदनशीलता, तकनीक के साथ जनसंवाद और कार्रवाई के साथ अपराध की रोकथाम का संतुलन दिखाई दे रहा है। अब इस पहल की असली परीक्षा इसके धरातलीय परिणामों से होगी। ‘देवभूमि का सुरक्षा कवच’ यदि जनभागीदारी का मजबूत नेटवर्क खड़ा करने में सफल रहा तो यह कुमाऊं में पुलिसिंग की एक प्रभावी और अनुकरणीय पहल बन सकती है।

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