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धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 72 रुपये की वृद्धि
सामान्य धान 2,441 एवं ए-ग्रेड धान 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित।

सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत।

स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन एवं आयात निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार का बड़ा कदम।

दर्पण न्यूज 24/7 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 72 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव  ने बताया कि सामान्य धान का एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तथा ए-ग्रेड धान का एमएसपी 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। यह नई दरें सितंबर-अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगी।
उन्होंने कहा कि धान का एमएसपी उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक रखा गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से किसानों को लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा, जबकि धान की कुल खरीद 824.41 लाख टन रहने की संभावना है।
सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया
विदेशी मुद्रा संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय।
केंद्र सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और पश्चिम एशिया में जारी संकट को देखते हुए सोने एवं चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। पूर्व में यह शुल्क 6 प्रतिशत था। इसके अतिरिक्त प्लैटिनम पर आयात शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है। नई दरें 13 मई से प्रभावी मानी जाएंगी।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से गैर-आवश्यक आयात में कमी आएगी तथा विदेशी मुद्रा की बचत होगी। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने एवं चांदी का आयात 26.7 प्रतिशत बढ़कर 102.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। कुल आयात में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने तथा बाह्य क्षेत्र के विवेकपूर्ण प्रबंधन के लिए यह कदम आवश्यक माना जा रहा है।
कोयला गैसीकरण परियोजनाओं हेतु 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना स्वीकृत
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन एवं आयात निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम।
केंद्र सरकार ने कोयले से गैस बनाने की परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को स्वीकृति प्रदान की है। सरकार को आशा है कि इस योजना के माध्यम से लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के पास लगभग 40.1 करोड़ टन का ज्ञात कोयला भंडार उपलब्ध है, जो आगामी 200 वर्षों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
कोयला गैसीकरण प्रक्रिया के अंतर्गत ठोस कोयले को कृत्रिम गैस ‘सिनगैस’ में परिवर्तित किया जाता है। इस गैस का उपयोग मेथनॉल, उर्वरक, हाइड्रोजन तथा विभिन्न रसायनों के निर्माण में किया जाता है। इससे आयातित कच्चे तेल, मेथनॉल एवं अमोनिया पर निर्भरता कम होगी तथा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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