








2027 से पहले लालकुआं भाजपा में अंदरूनी संग्राम तेज, नवीन दुमका के पुराने बयान को बनाया जा रहा है सियासी हथियार!
(दर्पण न्यूज 24/7 ब्यूरो : प्रमोद बमेटा)
लालकुआं।
लालकुआं विधानसभा में 2027 चुनाव से पहले भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमाने लगी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद पूर्व विधायक नवीन दुमका द्वारा दिया गया बयान अब फिर से सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के समर्थक सोशल मीडिया पर उस पुराने इंटरव्यू को वायरल कर राजनीतिक तंज कस रहे हैं, जिससे भाजपा के भीतर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है।
दरअसल, वर्ष 2022 में भाजपा ने नवीन दुमका की जगह जिला पंचायत सदस्य रहे डॉ. मोहन सिंह बिष्ट को प्रत्याशी बनाया था। टिकट कटने के बाद नवीन दुमका ने मीडिया से बातचीत में पार्टी के फैसले पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि संगठनात्मक प्रक्रिया उनके पक्ष में थी, लेकिन “कहीं न कहीं कोई बड़ी हैसियत भारी पड़ गई।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अब उसी बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों के दो गुट आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। फेसबुक पेज “टीम डॉ. मोहन सिंह बिष्ट” द्वारा पुराने इंटरव्यू का वीडियो साझा करते हुए टिप्पणी की गई है कि 2022 में जो लोग भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ माहौल बना रहे थे और “कांग्रेस मजबूत हो रही है” जैसे बयान दे रहे थे, आज वही खुद को सबसे बड़ा भाजपा समर्थक साबित करने में जुटे हैं।
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि कठिन समय में संगठन के साथ खड़े रहने वालों और परिस्थितियों के अनुसार रुख बदलने वालों में फर्क आखिर कैसे तय होगा। टिप्पणी में संगठन और निष्ठा की राजनीति का हवाला देते हुए यह संकेत भी दिया गया कि 2027 में प्राथमिकता समर्पित कार्यकर्ताओं को मिलनी चाहिए, न कि उन चेहरों को जिनकी राजनीतिक भूमिका पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2022 में टिकट वितरण को लेकर जो असंतोष दबा हुआ था, वह अब 2027 से पहले फिर सतह पर आता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि लालकुआं भाजपा में शक्ति प्रदर्शन और गुटबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
हालांकि भाजपा संगठन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनाव से पहले अंदरूनी दबाव और शक्ति संतुलन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
