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क्या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है सिस्टम?

संवेदनशील कट पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग के जिम्मेदारों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सवाल—कब जागेगा प्रशासन?

हल्दूचौड़। राष्ट्रीय राजमार्ग के संवेदनशील कट और दुर्घटना संभावित स्थानों पर यातायात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी उस समय का इंतजार है, जब किसी हादसे के बाद मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी पड़े?

स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर यातायात का दबाव लगातार बना रहता है, लेकिन क्या वहां पर्याप्त संकेतक, चेतावनी बोर्ड और दूसरे जरूरी सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं? यदि हैं तो वाहन चालकों को कट और संभावित खतरे की पर्याप्त जानकारी क्यों नहीं मिलती? और यदि नहीं हैं तो अब तक जिम्मेदार विभाग ने इस दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाया?

कट की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। क्या वर्तमान कट यातायात के बढ़ते दबाव के अनुरूप है? क्या राष्ट्रीय राजमार्ग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी सुरक्षा ऑडिट या नियमित समीक्षा कराई है? क्या दुर्घटना संभावित स्थानों को चिह्नित कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं?

नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी?

सड़क सुरक्षा का एक और गंभीर पहलू नशे में वाहन चलाने वालों से जुड़ा है। सवाल यह है कि संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की नियमित चेकिंग कितनी प्रभावी है? क्या नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई हो रही है या अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?

स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन से यातायात व्यवस्था मजबूत करने, पर्याप्त संकेतक एवं चेतावनी बोर्ड लगाने, कट की व्यवस्था की समीक्षा करने और नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी सवालों में

जब सड़क सुरक्षा सीधे आम लोगों की जान से जुड़ा विषय है तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल क्यों न उठें? क्या जनप्रतिनिधियों ने संवेदनशील कटों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित विभाग से जवाब मांगा है? क्या इस मुद्दे को प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों के सामने गंभीरता से उठाया गया है?

सवाल कई हैं, जवाब किसके पास है?

क्या राष्ट्रीय राजमार्ग के जिम्मेदार अधिकारी हादसे से पहले व्यवस्था सुधारेंगे?
क्या पुलिस प्रशासन संवेदनशील स्थानों पर प्रभावी चेकिंग बढ़ाएगा?
क्या जनप्रतिनिधि जनता की इस चिंता को गंभीरता से उठाएंगे?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या व्यवस्था किसी हादसे के बाद जागेगी या हादसा होने से पहले ही जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?

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