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‘ना’ कहते-कहते फिर जागा चुनावी मोह, हरिद्वार से विधानसभा पहुंचने की हरीश रावत की हसरत!

हरिद्वार से पुराने रिश्ते का हवाला देकर जताई चुनाव लड़ने की इच्छा, अल्मोड़ा का जिक्र कर बढ़ाई सियासी चर्चाएं!

दर्पण न्यूज 24/7| हल्द्वानी

सियासत में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनसे दूरी बनाना आसान नहीं होता। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए हरिद्वार का रिश्ता कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। कुछ समय पहले विधानसभा चुनाव से दूर रहने की बात कह चुके रावत ने अब एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा जाहिर कर दी है। इस बार निगाह हरिद्वार की किसी विधानसभा सीट पर है।

24 सितंबर को सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में रावत ने लिखा कि उम्र बढ़ रही है, लेकिन हरिद्वार के साथ उनका ‘रोमांस’ भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। 2009 से 2014 तक हरिद्वार का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने के दौर को उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम काल बताया। उन्होंने पुराने मतदाता-प्रतिनिधि संबंधों को याद करते हुए कहा कि उनके मन में इच्छा उठ रही है कि क्या वह एक बार फिर हरिद्वार का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

रावत ने हरिद्वार के लिए अपने मन में कई योजनाओं का जिक्र करते हुए विधानसभा को ‘हरिद्वारमय’ करने की इच्छा भी जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि हरिद्वार से मजबूत और समन्वयकारी नेतृत्व विधानसभा में पहुंचाने का प्रयास करेंगे। यानी मन की बात भी कह दी और फैसला पार्टी नेतृत्व के पाले में भी डाल दिया।

‘दिल है कि मानता नहीं’ 

रावत की राजनीति में भावनात्मक संवाद कोई नई बात नहीं है। इस बार भी उन्होंने हरिद्वार से अपने रिश्ते को यादों और भावनाओं के साथ जोड़ा। यही वजह है कि उनकी पोस्ट को महज चुनावी घोषणा की बजाय इच्छा और राजनीतिक संकेत—दोनों के रूप में पढ़ा जा रहा है।

हालांकि उन्होंने खुद अंतिम निर्णय को परिस्थितियों और पार्टी के व्यापक सवालों से जोड़ा है। ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह हरिद्वार की किसी खास विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। इतना जरूर है कि उनकी पोस्ट ने 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर चर्चाओं को नई हवा दे दी है।

हरिद्वार के साथ अल्मोड़ा का जिक्र क्यों?

रावत की पोस्ट का दूसरा दिलचस्प पहलू अल्मोड़ा का जिक्र है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की सेवा करते हुए भी अल्मोड़ा को ध्यान में रखेंगे। इसी बात ने कुमाऊं की राजनीति में अटकलों का नया दरवाजा खोल दिया है।

क्या यह केवल उनके पुराने राजनीतिक-सामाजिक रिश्तों का संदर्भ है या इसके पीछे कोई चुनावी संदेश भी है? फिलहाल रावत ने अल्मोड़ा की किसी विधानसभा सीट का नाम नहीं लिया है। सल्ट को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में इस सीट का नाम जरूर उभर रहा है।

यहीं से सवाल पैदा होता है—हरिद्वार की बात करते-करते अल्मोड़ा को याद करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह समर्थकों के लिए कोई संदेश है या महज पुराने रिश्तों की स्मृति? इसका जवाब अभी रावत के पास ही है।

हरिद्वार में इच्छा, अल्मोड़ा में संकेत?

एक तरफ हरिद्वार से विधानसभा पहुंचने की इच्छा, दूसरी तरफ अल्मोड़ा को ध्यान में रखने की बात। रावत ने भले ही अपने पत्ते पूरी तरह न खोले हों, लेकिन उनकी पोस्ट ने इतना जरूर कर दिया है कि हरिद्वार से लेकर अल्मोड़ा तक कांग्रेस के संभावित दावेदारों की निगाहें अब उनकी अगली चाल पर टिक गई हैं।

सियासत में इसे चाहे दिल की आवाज कहें या चुनावी दस्तक, फिलहाल इतना तय है कि हरीश रावत ने चुनावी चर्चा से खुद को बाहर नहीं रखा है। एक दिन पहले तक जहां चुनावी राजनीति से दूरी की बातें थीं, वहीं अब हरिद्वार से विधानसभा पहुंचने की इच्छा सार्वजनिक है।

और रावत की शैली को समझने वाले शायद यही कहेंगे

‘मोहब्बत हो तो ऐसी कि दूरी में भी मुलाकात की गुंजाइश बनी रहे।’

अब देखना यह है कि हरिद्वार से निकली यह सियासी इच्छा सिर्फ पोस्ट तक रहती है या 2027 के चुनावी मैदान तक पहुंचती है।

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