धामी सरकार पर विपक्ष का करारा वार, बजट को बताया दिशाहीन और निराशाजनक!
प्रमोद बमेटा, ब्यूरो
दर्पण न्यूज 24/7
गैरसैंण। उत्तराखंड सरकार द्वारा पेश किए गए बजट पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बजट को पूरी तरह निराशाजनक, दिशाहीन और जमीनी सच्चाइयों से कटा हुआ बताते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों की बाजीगरी और पुराने वादों की पुनरावृत्ति भर है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सहायतित योजनाओं पर आश्रित इस बजट में नई सोच, ठोस योजनाओं और दूरदर्शिता का पूरी तरह अभाव दिखाई देता है। यह बजट जनता के साथ एक और छलावा है, जिससे युवाओं, किसानों, व्यापारियों, मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग—सभी को निराशा ही हाथ लगी है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने पुरानी बोतल में नया शरबत परोसने का प्रयास किया है और जादुई आंकड़ों के सहारे विकास का भ्रम पैदा किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि आगे भी केवल डीपीआर बनाने का खेल चलता रहेगा और योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
आर्य ने आरोप लगाया कि सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का नतीजा है कि आज उत्तराखंड पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 में जहां राज्य पर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, वहीं वर्ष 2026 तक यह बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम) के अनुसार राज्य का कर्ज सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत तक सीमित रखा जाना चाहिए, लेकिन उत्तराखंड यह सीमा वर्ष 2019-20 में ही पार कर चुका है। कई बार ऐसी खबरें सामने आती हैं कि सरकार को कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए भी खुले बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि डबल इंजन सरकार विकास कार्यों पर बजट खर्च करने में भी असफल साबित हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मूल बजट का लगभग 50 प्रतिशत और कुल बजट का मात्र 45 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है। यह स्थिति सरकार के दावों की पोल खोलती है और दर्शाती है कि प्रदेश में विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
उन्होंने कहा कि सड़कों की हालत खराब है, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावे भी अधूरे हैं। किसानों की कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने जैसी योजनाएं या तो अधूरी हैं या फाइलों में दबी हुई हैं।
आर्य ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भी आज तक पूरा नहीं हो पाया है। इस बजट में भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि यंत्रों से जीएसटी हटाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के मोर्चे पर भी यह बजट पूरी तरह निराशाजनक है। दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों, मध्यम वर्ग और ग्रामीण गरीबों के लिए कोई प्रभावी और क्रांतिकारी योजना इसमें दिखाई नहीं देती।
स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही है, जबकि प्रदेश के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि पुष्कर सिंह धामी सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है और यह बजट प्रदेश के विकास की स्पष्ट दिशा तय करने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है।
