








जैविक खेती ही है भविष्य की राह, किसानों को अपनानी होगी प्राकृतिक कृषि।
विधायक मोहन सिंह बिष्ट।
बिंदुखत्ता में आयोजित कार्यशाला में किसानों को दिया आत्मनिर्भर और स्वस्थ खेती का मंत्र।
दर्पण न्यूज 24/7 प्रमोद बमेटा, लालकुआं
रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच जैविक एवं प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने किसानों से प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भूमि की उर्वरा शक्ति बचाने, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती ही सबसे प्रभावी विकल्प है।
रविवार को विधायक के द्वितीय दिवस प्रवास कार्यक्रम के अंतर्गत बिंदुखत्ता के पुराना बिंदुखेड़ा स्थित स्वयंवर बैंक्वेट हॉल में जैविक एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में क्षेत्र के किसानों, युवाओं और आमजन ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में प्राकृतिक और जैविक खेती न केवल कृषि भूमि को सुरक्षित रखने का माध्यम है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती के नवाचारों को अपनाने की अपील की।
कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना तथा कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान उपस्थित किसानों ने जैविक खेती अपनाने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता दिनेश खुल्बे, मंडल अध्यक्ष विजय रोहित दुमका, मंडल अध्यक्ष अरुण जोशी, जिला मंत्री प्रकाश आर्य, वरिष्ठ भाजपा नेता कुंदन सिंह चुफाल, भाजयुमो जिला कार्यालय मंत्री मनीष बोरा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, मातृशक्ति, युवा एवं क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।
