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“सफेद कोट के पीछे छुपा दर्द”: नैनीताल बीडी पांडे अस्पताल में तैनात सर्जन पति पर मारपीट का आरोप, महिला डॉक्टर बोली—दहेज के लिए तोड़ी जिंदगी!
देहरादून।
मरीजों की जिंदगी बचाने वाले डॉक्टरों के घर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने रिश्तों की संवेदनहीन सच्चाई उजागर कर दी है। दून अस्पताल में कार्यरत एक महिला चिकित्सक ने अपने सर्जन पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
डॉ. आसना पंत की शिकायत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं?
प्रेम विवाह से प्रताड़ना तक का सफर!
हल्द्वानी के सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान डॉ. पंत और डॉ. प्रशांत ओली के बीच प्रेम संबंध शुरू हुए थे। इंटर्नशिप के बाद दोनों ने 22 फरवरी 2023 को शादी की। लेकिन शादी के बाद हालात बदलते चले गए।
आरोप है कि सास हंसलता ओली ने दहेज को लेकर ताने देने शुरू कर दिए और कार समेत अन्य मांगों का दबाव बनाया गया। मजबूरी में पीड़िता के पिता को 10 लाख रुपये का चेक देना पड़ा, जो दंपती के संयुक्त खाते में जमा हुआ।
डिलीवरी के बाद भी नहीं थमा अत्याचार का आरोप!
डॉ. पंत ने 3 मार्च 2025 को सिजेरियन डिलीवरी के जरिए बच्चे को जन्म दिया। लेकिन मां बनने की खुशी भी उनके लिए सुकून नहीं ला सकी। आरोप है कि 19 अगस्त 2025 को उनके पति ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की, जमीन पर पटक दिया और गला दबाने की कोशिश की।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घटना उनकी मां के सामने हुई, फिर भी हालात नहीं बदले।
समझौते की कोशिशें नाकाम!
पीड़िता के अनुसार, परिवार और समाज के स्तर पर कई बार समझौते की कोशिशें हुईं, लेकिन प्रताड़ना खत्म नहीं हुई। यहां तक कि डिलीवरी के खर्च तक को लेकर ताने दिए जाते रहे।
पुलिस जांच में जुटी!
कोतवाली प्रभारी हरिओम चौहान के मुताबिक, पति डॉ. प्रशांत ओली, ससुर प्रदीप ओली और सास हंसलता ओली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
कठोर सवाल!
यह घटना सिर्फ एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जहां ऊंची शिक्षा और सम्मानजनक पेशा भी महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रहा।
क्या अब भी दहेज और हिंसा जैसी कुरीतियां सफेद कोट के भीतर जिंदा हैं?

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