जौनसार में जमीन खरीद विवाद पर हड़कंप, पाकिस्तान लिंक के दावे ने बढ़ाई सनसनी।
दर्पण न्यूज 24*7 ब्यूरो।
जौनसार–भावर (कालसी/हरिपुर)। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने जनजातीय क्षेत्र जौनसार–भावर में जमीन खरीद को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पंवार के अनुसार जनजातीय क्षेत्र की 10 बीघा भूमि एक कश्मीर निवासी गुलाम अली ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीदी है, जबकि इस क्षेत्र में बाहरी व्यक्ति के लिए भूमि हस्तांतरण पर विशेष प्रतिबंध लागू हैं।
पंवार ने दावा किया कि इसी प्रकरण से जुड़े दो वीडियो पाकिस्तान से जारी हुए हैं, जिनमें कुछ लोग हरिपुर कालसी स्थित भूमि को अपने पूर्वजों की बताते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे मामले में सीमा-पार फंडिंग और हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई है। हालांकि अभी तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जौनसार–भावर संविधान सूचीबद्ध जनजातीय क्षेत्र है, जहां भूमि हस्तांतरण के लिए विशिष्ट कानूनी प्रक्रियाएं अनिवार्य हैं। दूसरी ओर, उत्तराखंड सरकार हाल ही में सख्त भू-कानून लागू करने का दावा कर रही है, जिसमें बाहरी व्यक्तियों द्वारा कृषि भूमि खरीद पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध शामिल हैं। ऐसे में जनजातीय क्षेत्र की जमीन बाहरी व्यक्ति के नाम दर्ज होने से प्रशासन की निगरानी और सरकारी दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
मोर्चा अध्यक्ष पंवार ने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति के नाम जमीन खरीदी गई है, वह पहले जम्मू–कश्मीर पुलिस में कर्मचारी रह चुका है और एक आतंकी हमले में संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त किया गया था। पंवार का आरोप है कि वह अवैध और संदिग्ध धन को उत्तराखंड में खनन क्रशरों और प्रॉपर्टी डील्स के माध्यम से निवेश कर रहा है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के अधीन है।
पंवार ने यह भी कहा कि भूमि खरीद का यह पूरा मामला स्थानीय नेताओं, भू–माफियाओं और कुछ भ्रष्ट अफसरों की मिलीभगत से संभव हुआ है, जिससे जनजातीय क्षेत्र को कथित रूप से मनी लॉन्डरिंग के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। पंवार के अनुसार पाकिस्तान समर्थक वीडियो और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए ‘रेड फ्लैग’ की तरह हैं और इनकी गहन जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट यह साबित नहीं कर देती कि धन का स्रोत सीमा-पार या आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, तब तक इसे पक्के निष्कर्ष के रूप में नहीं, बल्कि जांच योग्य आशंका के रूप में देखा जाना चाहिए।
मामले में तीन स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है। राजस्व और रजिस्ट्रेशन विभाग से यह प्रश्न उठ रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कैसे हो गया। लेखपाल, पटवारी, रजिस्ट्रार और एसडीएम की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व पर आरोप है कि कमीशन और वोट बैंक के दबाव में जनजातीय हितों की अनदेखी हुई। वहीं राज्य सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि नया भू-कानून लागू करने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं की जा सकी।
जौनसार की भूमि वहां के जनजातीय समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान मानी जाती है। संदिग्ध निवेश और जमीन खरीद से स्थानीय लोगों के अपने ही क्षेत्र में धीरे-धीरे किरायेदार बनने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। पाकिस्तान समर्थक सामग्री सामने आने से सामाजिक तनाव और ध्रुवीकरण की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।
पंवार ने विवादित भूमि खरीद की उच्चस्तरीय ज्यूडिशियल या एसआईटी जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि एनआईए, ईडी और इंटेलिजेंस एजेंसियों को धन के स्रोत, बैंकिंग चैनल, शेल कंपनियों और खनन इकाइयों तक की वित्तीय श्रृंखला की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में भूमि संबंधी नियमों को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की भी आवश्यकता बताई है।
