खबरें शेयर करें -

लालकुआं विधानसभा मिशन 2027!
बिछने लगी सियासी विसात, ‘स्थानीय बनाम पैराशूट’ की जंग भी हुई तेज!
धर्मेंद्र शर्मा विशेष संवाददाता दर्पण न्यूज 24/7 !
लालकुआं विधानसभा में वर्ष 2027 के चुनावों की आहट के साथ ही सियासत गरमाने लगी है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। दोनों प्रमुख दल—भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख दावेदार अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। एक ओर जहां स्थानीय जमीनी नेता जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले ‘पैराशूट’ दावेदारों की एंट्री ने समीकरणों को उलझा दिया है।
स्थानीय नेताओं का दावा है कि वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय रहने, जनता के सुख-दुख में शामिल होने और विकास कार्यों की लड़ाई लड़ने का लाभ उन्हें मिलना चाहिए। उनका मानना है कि बाहरी या अचानक उतारे गए प्रत्याशी क्षेत्र की नब्ज को नहीं समझ सकते। यही वजह है कि कार्यकर्ताओं के बीच भी स्थानीय चेहरे को टिकट देने की मांग जोर पकड़ रही है।
दूसरी तरफ, बड़े राजनीतिक चेहरे और हाईकमान की पसंद के ‘पैराशूट’ उम्मीदवार भी टिकट जेब में होने का दंभ भरते हुए अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं। इनकी राजनीतिक पकड़, संसाधन और प्रभावशाली नेटवर्क पार्टी के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी स्वीकार्यता एक बड़ा सवाल बनी हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, जनता भी अब पहले से ज्यादा सजग नजर आ रही है। लोग खुलकर 2022 के विधानसभा चुनावों का हवाला दे रहे हैं, जब हरीश रावत को लालकुआं सीट से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव ने यह साफ संदेश दिया था कि केवल बड़ा नाम या राजनीतिक कद ही जीत की गारंटी नहीं है—स्थानीय जुड़ाव और जनता का विश्वास ही असली ताकत है।
यही वजह है कि इस बार ‘स्थानीय बनाम पैराशूट’ का मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बनता जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पार्टियां क्या इस बार भी जोखिम उठाएंगी या फिर स्थानीय चेहरे पर दांव खेलेंगी।
लालकुआं की सियासत फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा। आने वाले दिनों में टिकट वितरण के साथ यह साफ हो जाएगा कि पार्टियां किस रणनीति के साथ मैदान में उतरेंगी—लेकिन इतना तय है कि 2027 का चुनाव दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला होने जा रहा है।

उत्तराखंड