








लालकुआं विधानसभा: दावेदारों की भीड़ में उलझी कांग्रेस, क्या 2027 से पहले सुलझेगा समीकरण
प्रमोद बमेटा, ब्यूरो — दर्पण न्यूज 24/7
उत्तराखंड की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही लालकुआं विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनती जा रही है। सत्ता विरोधी लहर (एंटी इंकम्बेंसी) की चर्चाओं के बीच कांग्रेस के लिए यहां अवसर तो दिख रहा है, लेकिन अंदरूनी हालात पार्टी के लिए चुनौती भी खड़े कर रहे हैं।
लालकुआं सीट पर कांग्रेस से संभावित दावेदारों की लंबी फेहरिस्त सामने आ रही है। जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है, उनमें हरेंद्र बोरा, हेमवती नंदन दुर्गापाल, प्रमोद कालोनी, नितिन पंत, शंकर जोशी, बालम सिंह बिष्ट, उमेश कबड़वाल और राजेंद्र खनवाल शामिल हैं। वहीं महिला नेतृत्व में बीना जोशी भी मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में मानी जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में एंटी इंकम्बेंसी का माहौल कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा है। जनता बदलाव के मूड में नजर आ रही है, जिससे पार्टी को फायदा मिल सकता है। लेकिन दूसरी ओर, एक ही सीट पर इतने दावेदारों का सक्रिय होना पार्टी के भीतर असमंजस और गुटबाजी को बढ़ावा दे रहा है।
लालकुआं में कांग्रेस के भीतर अलग-अलग खेमों की सक्रियता अब खुलकर सामने आने लगी है। कार्यकर्ताओं के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि आखिर टिकट किसे मिलेगा? यदि समय रहते संगठन ने स्पष्ट रणनीति नहीं बनाई, तो यही अंदरूनी खींचतान चुनाव में नुकसान का कारण बन सकती है।
राजनीतिक जानकारों का साफ कहना है कि लालकुआं जैसी अहम सीट पर जीत के लिए कांग्रेस को “एक चेहरा, एक रणनीति” के फॉर्मूले पर काम करना होगा। जमीनी पकड़ वाले, स्वीकार्य और जीताऊ प्रत्याशी पर सहमति बनाना जरूरी है।
लालकुआं विधानसभा इस बार कांग्रेस के लिए बड़ा मौका बन सकती है, लेकिन अगर दावेदारों की भीड़ और गुटबाजी पर लगाम नहीं लगी, तो यह मौका चुनौती में भी बदल सकता है।
अब सवाल यही—क्या कांग्रेस समय रहते संभलेगी या लालकुआं में अंदरूनी जंग ही बनेगी हार की वजह?
