








नैनीताल में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था: एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा, मरीज बेहाल!
दर्पण न्यूज 24/7 लालकुआं ।
देवभूमि उत्तराखंड में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच नैनीताल जनपद से जो तस्वीर सामने आ रही है, वह व्यवस्था की हकीकत को उजागर करती है। यहां सरकारी अस्पतालों में न सिर्फ एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा है, बल्कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी चरमराई हुई हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मोटाहल्दू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लालकुआं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समेत अधिकांश सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन पूरी तरह खत्म हो चुकी है। डॉग बाइट और वन्यजीव हमलों के शिकार मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें बिना टीका लगाए ही वापस लौटना पड़ता है। मजबूरन लोग निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है। अक्सर सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं और संसाधन समय पर उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में गरीब और ग्रामीण तबके के लिए इलाज कराना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गर्भवती महिलाओं को भी प्रसव के लिए हल्द्वानी या अन्य बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, सीमित सुविधाएं समेत एक्सरे,अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत संसाधनों का अभाव मरीजों की परेशानी को और बढ़ा रहाहैं।
रेबीज जैसी घातक बीमारी में समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन का अभाव स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। चुनावी वादों और सरकारी दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि आम जनता आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जूझ रही है।
जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल प्रभाव से वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करे और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाए। जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक ऐसे ही आम लोगों का दर्द यूं ही सामने आता रहेगा।
