सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सुधीर कन्याल के तबादले पर भड़का जनाक्रोश, आंदोलन की चेतावनी!
संलग्नीकरण निरस्त करने और स्थानांतरण आदेश के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल, आरटीआई एक्टिविस्ट बोले सीएचसी हल्दूचौड़ को न बनाया जाए ‘शोपीस’ ।
दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़। शासन द्वारा चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में जारी
प्रशासनिक आदेशों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ के प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर कुमार कन्याल का टनकपुर उप जिला चिकित्सालय, चम्पावत स्थानांतरण किए जाने से क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले विभाग ने संबद्धीकरण (अटैचमेंट) निरस्त कर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मूल तैनाती स्थल पर योगदान देने के निर्देश जारी किए, वहीं अब वार्षिक स्थानांतरण के तहत डॉ. कन्याल का तबादला कर दिया गया है। इन आदेशों के बाद हल्दूचौड़ की स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं समाजसेवी गोविंद बल्लभ भट्ट ने कहा कि हल्दूचौड़ का स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही चिकित्सकों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सीमित संसाधनों के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र को व्यवस्थित रूप से संचालित कर रहे डॉ. सुधीर कन्याल का स्थानांतरण क्षेत्रवासियों के हित में नहीं है। उनका कहना है कि यदि उनके स्थान पर तत्काल सक्षम चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ महज “शोपीस” बनकर रह जाएगा और हजारों ग्रामीणों को इलाज के लिए हल्द्वानी की ओर रुख करना पड़ेगा।
भट्ट ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में जारी आदेशों में संबद्धीकरण समाप्त करने, मूल तैनाती स्थल पर तत्काल योगदान देने तथा वार्षिक स्थानांतरण के निर्देश शामिल हैं। ऐसे में शासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि हल्दूचौड़ में विशेषज्ञ चिकित्सक की व्यवस्था किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानांतरण आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया अथवा हल्दूचौड़ में तत्काल समकक्ष चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि हल्दूचौड़ एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों की बड़ी आबादी इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। ऐसे में एक अनुभवी चिकित्सक के स्थानांतरण के बाद स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका से लोगों में गहरी नाराजगी है। अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
