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संघे शक्ति सर्वदा! एकजुट हुए ग्रामीण तो झुके क्रशर संचालक!

हरिपुर बच्ची सड़क आंदोलन का असर,

क्रशर स्वामियों ने मानी मांगें, लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त!

दर्पण न्यूज 24/7 हल्दूचौड़।

“संघे शक्ति सर्वदा”, यानी एकता में हमेशा शक्ति होती है। हरिपुर बच्ची में ग्रामीणों ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया। बदहाल सड़क को लेकर शुरू हुआ ग्रामीणों का आंदोलन आखिरकार रंग लाया और एकजुट ग्रामीणों के आगे क्रशर संचालकों को मांगें मानने के साथ ही लिखित आश्वासन देना पड़ा।

राष्ट्रीय राजमार्ग से हरिपुर बच्ची गांव की ओर जाने वाले मार्ग की बदहाली और क्रशरों के भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया था। ग्रामीणों ने साफ कर दिया था कि जब तक सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरना शुरू होने के बाद धीरे-धीरे आंदोलन को सामाजिक और राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा। कांग्रेस नेता उमेश कबड़वाल समेत अन्य लोगों ने धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों की मांगों को जायज बताया और सड़क निर्माण होने तक संघर्ष में साथ देने की बात कही। आंदोलन बढ़ता देख मामले ने प्रशासन का भी ध्यान खींचा।

दबाव बढ़ा तो आया लिखित आश्वासन

आखिरकार आंदोलन का असर हुआ। जगदम्बा स्टोन इंडस्ट्रीज, कृष्णा स्टोन इंडस्ट्रीज और आकृति नैचुरल प्रोडक्ट की ओर से ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया गया कि लगभग 400 मीटर मार्ग को तीन से चार माह के भीतर पक्का कराया जाएगा।

क्रशर संचालकों ने इसके लिए विधायक निधि, सांसद निधि अथवा स्वयं तीनों क्रशर संचालकों द्वारा सड़क निर्माण कराने की बात कही है।

इतना ही नहीं, सड़क बनने के बाद साफ-सफाई और पानी का नियमित छिड़काव जारी रखने, गांव में 10 सोलर लाइट और तीन कैमरे लगवाने, गरीब एवं अनाथ कन्याओं के विवाह में यथासंभव सहयोग करने तथा फलदार पौधों का वितरण करने का भी आश्वासन दिया गया है।

सड़क से शुरू हुआ संघर्ष, सुविधाओं तक पहुंचा

खास बात यह रही कि ग्रामीणों ने आंदोलन को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा। उनकी एकजुटता ने क्रशर संचालकों को गांव की अन्य जरूरतों पर भी सकारात्मक पहल के लिए आगे आने को मजबूर किया।

ग्रामीणों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या उद्योग के खिलाफ नहीं, बल्कि गांव के सम्मान, सुरक्षित आवागमन और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के लिए था। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।

हालांकि ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि अब उनकी नजर आश्वासन के क्रियान्वयन पर रहेगी। तीन से चार माह की समयसीमा में सड़क निर्माण नहीं हुआ तो वे फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।

एकता बनी ताकत, संघर्ष बना मिसाल

हरिपुर बच्ची का यह आंदोलन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि जब ग्रामीण  दल और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर गांव के हित में एकजुट होते हैं, तो उनकी आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होता।

सड़क पर उतरे ग्रामीणों की एकता ने आखिरकार रास्ता बना दिया।

“संघे शक्ति सर्वदा”—हरिपुर बच्ची के ग्रामीणों ने इस भावना को सिर्फ कहा नहीं, बल्कि करके दिखाया।